शुक्रवार की दो घटनाओं का असर बिहार की राजनीति पर

  • शुक्रवार की दो घटनाओं का असर बिहार की राजनीति पर
You Are HereNational
Saturday, December 14, 2013-5:49 PM

पटना: दिल्ली में शुक्रवार को दो ऐसी घटनाएं घटीं, जिनका बिहार की राजनीति पर असर पडऩा तय माना जा रहा है। पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आर.के. सिंह ने जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण की, वहीं कुख्यात चारा घोटाले में पांच वर्ष कारावास की सजा पाए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद को सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत दे दी।

अगले वर्ष के प्रथम छह महीने में लोकसभा चुनाव होने की संभावना है, और राजद विरोधियों को उम्मीद थी कि नेता विहीन राजद की ताकत कम होगी, जिसका फायदा बिहार के प्रमुख दलों जनता दल (युनाइटेड) और भाजपा को मिलेगा। लेकिन लालू को जमानत मिलने के बाद माना जा रहा है कि राजद की सियासी हैसियत बढ़ेगी। राजद की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भाजपा और जद (यू) दोनों अपना मुकाबला राजद से ही मानते हैं।

राजनीति के जानकार और पटना के वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेश्वर कहते हैं, ‘‘बिहार की राजनीति में लालू प्रारंभ से ‘स्ट्राइकर’ रहे हैं। उनके जेल जाने और आने से उनकी राजनीतिक छवि पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता। लालू चुनाव भले नहीं लड़ पाएंगे, लेकिन कोच की भूमिका में तो रहेंगे ही।’’ ज्ञानेश्वर का मानना है कि लालू के आने से सबसे अधिक घाटा जद (यू) को होगा, क्योंकि जद (यू) मुसलमान मतदाताओं को ही रिझाने में लगा है। हाल के दिनों में कांग्रेस का रुझान राजद की ओर देखा जा रहा है, उससे यह तय माना जा रहा है कि राजद और कांग्रेस चुनाव मैदान में एकसाथ उतरेंगे। अगर यह परिस्थिति बनती है, तो निश्चित है कि अल्पसंख्यक मतदाताओं का आकर्षण जद (यू) नहीं होगा।

उल्लेखनीय है कि 2009 में सीटों के तालमेल के सवाल पर कांग्रेस ने राजद से दोस्ती तोड़ ली थी, लेकिन हाल ही में चार राज्यों के चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस सोच में पड़ गई है। जद (यू) के वरिष्ठ नेता और सांसद शिवानंद तिवारी कहते हैं कि चोरों और डकैतों को भी जमानत मिल जाती है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि लालू के जमानत मिलने से बिहार की राजनीति पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा।

इस बीच, शुक्रवार को भाजपा में शमिल हुए पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आर. के. सिंह को लेकर भी बिहार में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। सिंह वर्ष 1990 में जब समस्तीपुर के जिलाधिकारी थे तब उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी का रथ रोका था, लेकिन उन्हें राजनीति करने के लिए भाजपा ही पसंद आई। यह तय है कि जून 2013 में सेवानिवृत हुए सिंह बिहार की राजनीति में हाथ आजमाएंगे। ज्ञानेश्वर का कहना है कि बिहार में भाजपा के पास कोई धाकड़ राजपूत चेहरा नहीं था। सिंह के भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी को राजपूत चेहरा मिल गया है।

अब सिंह की राजनीति कैसी होगी और भाजपा उनका उपयोग किस प्रकार करेगी यह तो आने वाला समय बताएगा। लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खास माने जाने वाले सिंह ने राजनीति के लिए भाजपा को चुना, इसे लेकर बिहार में चर्चा का बाजार गर्म है। भाजपा नेताओं का कहना है कि दोनों परिस्थितियां उनके लिए शुभ संकेत हैं। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता नंदकिशोर यादव कहते हैं कि लालू के जमानत मिलने का असर जद (यू) पर पड़ेगा। राजद तो जद (यू) के प्रत्याशियों को डैमेज करेगा। उनका दावा है कि भाजपा राज्य की सभी 40 सीटों पर पहले नंबर पर होगी।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You