गांगुली ने एएसजी द्वारा इंटर्न का हलफनामा सार्वजनिक करने पर उठाया सवाल

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Monday, December 16, 2013-1:45 PM

कोलकाता: अतिरिक्त सोलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह द्वारा लॉ इंटर्न के हलफनामे के कुछ हिस्से को सार्वजनिक किए जाने पर उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश ए के गांगुली ने आज सवाल उठाया कि एक गोपनीय बयान को कैसे सार्वजनिक किया जा सकता है? न्यायमूर्ति गांगुली इंटर्न के यौन उत्पीडऩ के आरोपी हैं।

न्यायमूर्ति गांगुली ने कहा, ‘‘ यह हलफनामा उच्चतम न्यायालय की एक समिति के समक्ष दिया गया था और यह गोपनीय समझा जाता है । यह सार्वजनिक कैसे हो सकता है? ’’ यह पूछे जाने पर कि क्या वे इसके बारे में शिकायत करेंगे , सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने प्रेट्र से कहा, ‘‘ मैं क्या करूं ? कौन मेरी सुन रहा है? ’’

उन्होंने इंटर्न के हलफनामे पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा, ‘‘ मैं इस पर कुछ नहंी कहूंगा। ’’ यह हलफनामा एक राष्ट्रीय दैनिक में प्रकाशित हुआ है। कोलकाता लॉ स्कूल से पास इंटर्न ने उच्चतम न्यायालय के तीन न्यायाधीशों की समिति के समक्ष एक हलफनामा दिया था जिसमें 24 दिसंबर 2012 की रात को दिल्ली के एक होटल की उस घटना का जिक्र किया गया है। 

शीर्ष अदालत की समिति ने पूर्व जज को इंटर्न के प्रति ‘‘अवांछनीय व्यवहार’’ और ‘‘यौन प्रकृति के आचरण’’ का दोषी पाया था जो उस समय उनके साथ बतौर इंटर्न काम कर रही थीं। गांगुली अभी तक उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से इनकार करते रहे हैं । उन्होंने साथ ही पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है।

जयसिंह ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर उन्हें आयोग के प्रमुख के पद से हटाए जाने की मांग की है। कई महिला अधिकार कार्यकर्ताओं, भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं ने भी उन्हें पद से हटाए जाने की मांग की है।  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दो बार राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को पत्र लिखकर पूर्व जज के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर चुकी हैं।
 


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