नक्सली हमलों और रमन सिंह की तीसरी बार ताजपोशी का गवाह रहा वर्ष 2013

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Monday, December 16, 2013-1:41 PM

रायपुर: छत्तीसगढ़ में वर्ष 2013 राजनीतिक दृष्टि से खूब उथलपुथल का रहा। राज्य में इस वर्ष भाजपा को जहां लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का मौका मिला वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने नक्सली हमले में अपने कई नेताओं को खोया। छत्तीसगढ़ का धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर नक्सलियों के कब्जे में है। यह क्षेत्र नक्सली घटनाओं के लिए जाना जाता है। इस क्षेत्र में जहां सरकार की पहुंच कम है वहीं अंदरूनी इलाकों में माओवादियों की जनता सरकार काम करती है।

 

माना जाता रहा है कि यह नक्सल प्रभावित इलाका ही किसी भी दल को सत्ता तक लेकर जाता है। कारण साफ है कि पिछले दो चुनावों में भाजपा को इन्हीं इलाकों में भारी बढ़त मिली थी और वह सत्ता पर आसीन हुई थी। इस बार भी राजनीतिक दलों के लिए बस्तर महत्वपूर्ण था। इस इलाके की जनता का भरोसा जीतने की कोशिश के तहत मुख्यमंत्री ने जहां विकास यात्रा की शुरूआत की वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल के नेतृत्व में परिवर्तन यात्रा आरंभ की।

 

इस वर्ष 25 मई को पटेल के नेतृत्व में परिवर्तन यात्रा राज्य के बीजापुर जिले से लौट रही थी तब नक्सलियों ने बस्तर जिले की झीरम घाटी के पास घात लगा कर हमला किया। इस हमले में नक्सलियों ने सलवा जुडूम के संस्थापक तथा विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे महेंद्र कर्मा, पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत 28 नेताओं, कार्यकर्ताओं और पुलिस कर्मचारियों की हत्या कर दी तथा पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल को अपने साथ ले गए। अगले दिन दोनों के शव समीप ही जंगल में मिले। दोनों को नक्सलियों ने मार डाला था।

 

हमले में गंभीर रूप से घायल पूर्व सूचना एवं प्रसारण मंत्री तथा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल का 11 जून को हरियाणा के गुडग़ांव स्थित अस्पताल में निधन हो गया। कुल मिला कर हमले में 31 लोगों की जान गई और कांग्रेस ने एक तरह से राज्य का अपना समूचा शीर्ष नेतृत्व ही खो दिया। केंद्र सरकार ने इस हमले की एनआईए से जांच कराने की घोषणा कर दी वहीं राज्य शासन ने घटना की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए। फिलहाल, दोनों जांच रिपोर्टों का इंतजार है। वर्ष 2013 का अंतिम महीना सत्ताधारी भाजपा के लिए सुकून भरा रहा।

 

राज्य में नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जीत हासिल की और मुख्यमंत्री रमन सिंह के लिए तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया। राज्य की 90 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में भाजपा को 49 सीटें, कांग्रेस को 39 सीटें, बसपा को एक सीट तथा निर्दलीय को भी एक सीट मिली। इस चुनाव की खासियत यह रही कि पांच मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष, विधानसभा उपाध्यक्ष, विपक्ष के नेता समेत कई दिग्गजों को जनता ने बाहर का रास्ता दिखा दिया।

 

छत्तीसगढ़ के इस चुनावी वर्ष में राज्य के दोनों बड़े राजनीतिक दलों में घात भीतरघात और अंदरूनी लड़ाइयां भी हुई। कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल की मृत्यु के बाद कांग्रेस ने राज्य की कमान केंद्रीय मंत्री चरणदास महंत को सौंपी और कांग्रेस की गुटबाजी सतह पर आ गई जो चुनाव परिणाम आने के बाद भी जारी है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने इस चुनाव में अपने दिग्गजों के हारने का कारण भीतर घात को बताया है और कहा है वर्षों से जमे हुए नेताओं का हार जाना इस बात का संकेत है कि कहीं तो कुछ गड़बड़ है।

 

इस दौरान सत्ताधारी दल भाजपा भी अपने नेताओं की नाराजगी से परेशान रहा। नाराजगी के कारण ही पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की रिश्तेदार तथा पूर्व सांसद करूणा शुक्ला ने यह कहते हुए भाजपा से त्यागपत्र दे दिया कि पार्टी अब कुछ लोगों की जागीर हो गई है। शुक्ला ने राजनांदगांव विधानसभा सीट पर मुख्यमंत्री रमन सिंह को हराने के लिए कांग्रेस उम्मीदवार की तरफ से चुनाव प्रचार भी किया। इस चुनाव में भाजपा के पांच मंत्रियों की हार भी हुई।

 

राज्य में बस्तर राजघराने का भाजपा में शामिल होना भी राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण रहा। राजा प्रवीर चंद्र भंजदेव के वंशज राजा कमल चंद्र भंजदेव ने भाजपा मेंं प्रवेश किया तब भाजपा ने क्षेत्र में अपनी जीत की उम्मीद जताई। लेकिन चुनाव में भाजपा को बस्तर क्षेत्र की 12 सीटों में से 8 पर ही जीत हासिल हुई जबकि वर्ष 2008 के चुनाव में उसे यहां 11 सीटें मिली थीं। छत्तीसगढ़ में चुनाव की घोषणा से ठीक पहले मुख्य सचिव की चि_ी ने राज्य में सनसनी फैला दी थी।

 

सूत्रों के अनुसार राज्य के मुख्य सचिव सुनील कुमार ने मुख्यमंत्री रमन सिंह को पत्र लिखकर स्कूल शिक्षा विभाग में हुए कथित घोटाले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी। कुमार के मुताबिक किसी व्यक्ति ने केंद्रीय सतर्कता आयुक्त को पत्र लिखकर राज्य में स्कूल शिक्षा विभाग में घोटले की जानकारी दी थी तथा इसमें मुख्य सचिव के भी शामिल होने की बात कही गई थी। इसके बाद मुख्य सचिव ने मामले की सीबीआई से जांच की मांग कर दी। हालंकि बाद में मामला शांत हो गया। लेकिन पहले इसने यहां की राजनीति जरूर गर्म कर दी।


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