पद की गरिमा बचाने के लिए इस्तीफा दें न्यायमूर्ति गांगुली: जेटली

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Monday, December 16, 2013-5:00 PM

नर्इ दिल्ली:  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता अरूण जेटली ने कहा है कि उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अशोक कुमार गांगुली के खिलाफ यौन.उत्पीड़न के आरोप जांचे परखे हैं और  प्रशिक्षु महिला वकील की आपबीती के अंश सार्वजनिक होने के बाद उन्हें पद की गरिमा बचाये रखने के लिए इस्तीफा दे देना चाहिए।
 
जेटली ने आज फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि देश के प्रधान न्यायाधीश ने इस मामले में तीन न्यायाधीशों की कमेटी गठित की थी। प्रशिक्षु वकील और न्यायमूर्ति गांगुली दोनों ने इस कमेटी के समक्ष अपनी बात रखी थी। उन्होंने लिखा है कि मीडिया रिपोर्टों से यह संकेत मिले हैं कि कमेटी ने प्रशिक्षु वकील की शिकायत में कुछ तथ्य पाए हैं।इससे यह मामला कुछ अलग हो जाता है क्योंकि  न्यायमूर्ति के खिलाफ लगाये गए आरोप जांचे परखे हैं। ऐसे में न्यायमूर्ति गांगुली यह कहकर नहीं बच सकते कि कानून अपना काम करेगा।
  
उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति गांगुली एक राज्य के मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष हैं जो उच्च पद हैं इसलिए उन्हें हर तरह के संदेह से परे होना चाहिए। उनके पद पर बने रहने से कुछ सवाल उठते हैं। जैसे यदि यह मामला किसी राजनेता का होता तो क्या न्यायपालिका इससे अपना पल्ला झाड लेती या जांच की निगरानी करती।

दूसरा सवाल यह उठता है कि गंभीर आरोपों के चलते क्या न्यायमूर्ति गांगुली अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर सकते हैं। तीसरा क्या यह उचित नहीं होगा कि न्यायमूर्ति गांगुली आम नागरिक की तरह कानून का सामना करे। यदि वह अपना पद छोडते हैं तो इससे पद की गरिमा ही बढे़गी। उनके पद पर बने रहने से यही साबित होता है कि न्यायाधीश भी राजनेताओं की तरह तब तक पद पर बने रहते हैं जब तकि जनमत उन्हें बाहर न कर दे।


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