पढ़िए: नए LOKPAL बिल की कुछ खास बातें

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Thursday, December 19, 2013-7:12 AM

नई दिल्ली : आखिरकार लोकपाल विधेयक पर संसद की दोनों सदनों ने अपनी मुहर लगा दी। अब ये बिल राष्ट्रपति के पास जाएगा। राष्ट्रपति के अनुमोदन मिलते ही ये विधेयक कानून की शक्ल ले लेगा, लेकिन सवाल ये है कि क्या इस नए लोकपाल बिल से भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा। एक तरफ समाजसेवी अन्ना हजारे ने कहा है कि इस बिल से 40-50 फीसदी तक भ्रष्टाचार मिटेगा वहीं अरविंद केजरीवाल ने इसे जोकपाल करार दिया। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने इस बिल के लिए अन्ना हजारे को धन्यवाद दिया वहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है।

लोकपाल बिल का ढांचा :-
 
लोकपाल का एक अध्यक्ष होगा। लोकपाल का अध्यक्ष या तो भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश या फिर सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज या फिर कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति हो सकता है। लोकपाल में अधिकतम आठ सदस्य हो सकते हैं, जिनमें से आधे न्यायिक पृष्ठभूमि से होंगे। इसके अलावा कम से कम आधे सदस्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यकों और महिलाओं में से होने चाहिए।
 
लोकपाल की चयन समिति

 
- प्रधानमंत्री- अध्यक्ष
- लोकसभा के अध्यक्ष- सदस्य
- लोकसभा में विपक्ष के नेता- सदस्य
- मुख्य न्यायाधीश या उनकी अनुशंसा पर नामित सुप्रीम कोर्ट के एक जज- सदस्य
- राष्ट्रपति द्वारा नामित कोई प्रतिष्ठित व्यक्ति- सदस्य
 
 
कौन नहीं हो सकता लोकपाल का सदस्य?
 
- संसद सदस्य या किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा का सदस्य
- ऐसा व्यक्ति जिसे किसी किस्म के नैतिक भ्रष्टाचार का दोषी पाया गया हो
- ऐसा व्यक्ति जिसकी उम्र अध्यक्ष या सदस्य का पद ग्रहण करने तक 45 साल न हुई हो
- किसी पंचायत या निगम का सदस्य
 
पद छोडऩे के बाद
 
-लोकपाल कार्यालय में नियुक्ति खत्म होने के बाद अध्यक्ष और सदस्यों पर कुछ काम करने के लिए प्रतिबंध लग जाता है
-इनकी अध्यक्ष या सदस्य के रूप में पुनर्नियुक्ति नहीं हो सकती
-इन्हें कोई कूटनीतिक ज़िम्मेदारी नहीं दी जा सकती और केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक के रूप में नियुक्ति नहीं हो सकती। इसके अलावा ऐसी कोई भी जिम्मेदारी या नियुक्ति नहीं मिल सकती जिसके लिए राष्ट्रपति को अपने हस्ताक्षर और मुहर से वॉरंट जारी करना पड़े।
-पद छोडऩे के पांच साल बाद तक ये राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, संसद के किसी सदन, किसी राज्य विधानसभा या निगम या पंचायत के रूप में चुनाव नहीं लड़ सकते।

सज़ा
-सरकारी लोकपाल विधेयक में दोषी को छह से सात महीने की सज़ा हो सकती है और धोटाले के धन को वापिस लेने का कोई प्रावधान नहीं है। वहीं जनलोकपाल बिल में कम से कम पांच साल और अधिकतम उम्र क़ैद की सज़ा हो सकती है। साथ ही धोटाले की भरपाई का भी प्रावधान है।


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