40 साल पाक में रोने के बाद भारत में ढूंढ रहे खुशी

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Thursday, December 19, 2013-12:30 PM

नई दिल्ली (अभिषेक आनन्द): पाकिस्तान में  40 साल बिताने  के बाद अब वहां रह रहा हिन्दू परिवार भारत में खुशियां ढूंढने पहुंचा है। जंतर-मंतर पर सामने 15 से 20 महिलाएं बैठी हैं। इनमें 2 से 10 साल के कई बच्चे भी हैं। सब पाकिस्तान से आए हैं और कभी वापस नहीं लौटना चाहते। इनका वीजा एक्सपायर हो गया और सभी एक महीने के टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे।

नारायण दास बताते हैं कि हमें हमारा गहना चाहिए, सोना चाहिए। पत्नी की ओर इशारा करते हैं और साथ में मौजूद 4-5 और महिलाएं अपना छिला हुआ हाथ दिखाती हैं। महिलाएं बताती हैं कि 5 अक्तूबर को राजस्थान के मुनाबाव में कस्टम वालों ने शरीर से गहने उतार लिए। 3 साल की भागवन्ती, 5 साल के सुरेश, सात साल की अंजना और 11 साल के महेश के पिता नारायण कहते हैं कि हम सबने जमीन, घर, दुकान व जानवर बेचकर गहने बनवाए थे ताकि भारत में गहनों को बेचकर रहने का इंतजाम कर सकें।

पाकिस्तान छोडऩे की वजह: नारायण के भाई पंजुमल कहते हैं कि वहां हिंदू की कोई जिंदगी नहीं है। न बच्चे को ठीक से पढ़ा सकते हैं, न महिलाएं इज्जत से जी सकती हैं और न ही हम मंदिरों में पूजा कर सकते हैं। दो साल अथक प्रयास के बाद वीजा मिला। हंसते हुए जवाब देने का कारण पूछने पर नारायण बिफर पड़ते हैं।

कहते हैं 40 साल पाकिस्तान में रोकर बिताया तो क्या हम यहां भी रोते रहें। हालांकि फिर पूछते हैं क्या कोई अपनी बीवी-बच्चों के साथ घर-बाड़ छोड़कर यूं ही सड़क पर आ जाएगा। नारायण की ही तरह करीब तीन दर्जन से अधिक लोगों की मांग है कि इनके गहने लौटाए जाएं और अब हिन्दू होने के नाते भारत में ही रहने की जगह मिले।


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