मोदी का विश्वनाथ, संकटमोचन मंदिर जाना प्रशासन के लिए बना सिर दर्द

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Thursday, December 19, 2013-4:44 PM

वाराणसी: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी की कल यहां होने वाली रैली के दौरान उनका बाबा विश्वनाथ और संकटमोचन मंदिर जाने का कार्यक्रम प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है और इसे रद्द कराने की हर संभव कोशिश की जा रही है। प्रशासन का तर्क है कि वाराणसी संकरी गलियों का शहर है। सूत्रों के अनुसार रैली में 3 लाख लोगों के शामिल होने की संभावना है। यहां जाम की समस्या आम है इसलिए मोदी को विश्वनाथ और संकटमोचन मंदिर में दर्शन करने पर पुनर्विचार करना चाहिए। जिलाधिकारी प्रांजल यादव ने कहा कि यातायात की समस्या यहां रहती ही है। ऐसे में मोदी के कार्यक्रम के मद्देनजर यातायात एकदम से रोक देने से आम जनता की परेशानी बढ़ सकती है इसलिए प्रशासन की कोशिश है कि कल के बजाय किसी और दिन मोदी यहां आकर दर्शन करें। रैली की वजह से भी प्रशासन पर दबाव रहेगा और भीड़ रहेगी।

इसके बावजूद मोदी यदि दर्शन करना ही चाहेंगे तो प्रशासन इसकी पूरी व्यवस्था करेगा। उन्होंने कहा कि दोनों मन्दिरों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अभी यह तय नहीं है कि मोदी रैली के पहले दर्शन करेंगे या बाद में। मोदी पर पार्टी के अयोध्या जैसे मूल मुद्दों से बचने के आरोप लग रहे थे। इन आरोपों को जम्मू कश्मीर के संबंध में धारा 370 पर बहस की मांग ने और हवा दी। माना जा रहा है कि इन आरोपों को निर्मूल साबित करने के लिए उन्होंने विश्वनाथ और संकटमोचन मन्दिर जाने का फैसला लिया। विश्व हिन्दू परिषद, विहिप, विश्वनाथ मंदिर से सटे ज्ञानवापी मस्जिद पर भी दावा ठोकता रहा है। विहिप की मांग की वजह से विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र काफी संवेदनशील है और उसकी सुरक्षा व्यवस्था अयोध्या के विवादित रामजन्म भूमि मंदिर परिसर की ही तरह है। संकटमोचन मंदिर में सात मार्च 2007 को सिलसिलेवार विस्फोट हुआ था जिसमें कई लोग हताहत हुए थे।

विश्वनाथ मन्दिर जाने को राजनीतिक ²ष्टि से भी देखा जा रहा है। इस मदिंर में दक्षिण भारतीय काफी संख्या में आते हैं और पार्टी उत्तर की अपेक्षा दक्षिण भारत में कमजोर समझी जाती है। उनके विश्वनाथ मदिंर में जाने से दक्षिण भारत के श्रद्धालुओं पर मोदी के प्रति सहानुभूति पैदा हो सकती है। उत्तर प्रदेश में मोदी की कल पांचवीं रैली होगी। इससे पहले वह कानपुर, झांसी, बहराइच और आगरा में रैली कर चुके हैं। भाजपा की संगठनात्मक स्थिति को देखते हुए उन रैलियों को सफल कहा जा सकता है।
 


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