'समलैंगिकता पर फैसले के खिलाफ संसद और सरकार पहल नहीं करें'

  • 'समलैंगिकता पर फैसले के खिलाफ संसद और सरकार पहल नहीं करें'
You Are HereNational
Thursday, December 19, 2013-5:34 PM

नई दिल्ली: देश के जानेमाने धर्मगुरूओं ने समलैंगिकता पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए सरकार और संसद से मांग की है कि इस फैसले के खिलाफ कोई पहल नहीं की जाए क्योंकि इस तरह के संबंध भारत के सामाजिक और धार्मिक स्वभाव के विपरीत हैं।

प्रमुख मुस्लिम संगठन जमात-ए-इस्लामी हिंद के तत्वाधान में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धमो’ के धर्मगुरूओं ने आज संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि समलैंगिकता को भारत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। जमात के अमीर मौलाना जलालुद्दीन उमरी ने कहा, ‘समलैंगिकता ना सिर्फ सामाजिक और धार्मिक मूल्यों के खिलाफ है, बल्कि यह पूरी तरह मानवीय संबंधों के स्वभाव के भी विपरीत है। भारत जैसे धर्म और संस्कृति प्रधान देश में इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

इस संबंध में उच्चतम न्यायालय के फैसले का हम स्वागत करते हैं।’ ईसाई धर्मगुरू फादर डोमेनिक इमैनुअल ने कहा, ‘ईसाई धर्म में भी समलैंगिक संबंधों की मनाही है। हम समलैंगिकता को स्वीकार नहीं करते और यह भारत के सामाजिक परिदृश्य के खिलाफ है।’ लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि समलैंगिकों को ‘अपराधी’ नहीं कहा जा सकता। बांग्ला साहब गुरूद्वारे के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रंजीत सिंह ने भी समलैंगिकता का विरोध किया और कहा कि सरकार को इस फैसले के खिलाफ कोई पहल नहीं करनी चाहिए।

हिंदू धर्मगुरू जगत गुरू स्वामी ओंकारानंद ने कहा, ‘समलैंगिकता से वंश की परंपरा ही खत्म हो जाएगी। यह न सिर्फ धार्मिक मूल्यों, बल्कि प्रकृति के नियम के भी खिलाफ है। हमें फैसला करना है कि हम अपने समाज और देश को किस ओर ले जाना चाहते हैं।’
 


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You