सांप्रदायिक हिंसा विधेयक पारित होने से एनएचआरसी पर बढ़ेगा बोझ

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Thursday, December 19, 2013-8:10 PM

नई दिल्ली: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने आज कहा कि यदि सांप्रदायिक हिंसा रोधी विधेयक अपने ‘‘मौजूदा स्वरूप’’ में संसद में पारित हो जाता है तो इससे एनएचआरसी पर बोझ बढ़ जाएगा। एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति के जी बालकृष्णन ने कहा, ‘‘यदि कानून, अपने मौजूदा स्वरूप में, संसद में पारित कर दिया जाता है तो एनएचआरसी को काफी बोझ उठाना पड़ेगा।

एनएचआरसी के मौजूदा ढांचे और उपलब्ध सुविधाओं के मद्देनजर इन कार्यों को करना लगभग असंभव हो जाएगा।’’ हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि विधेयक पारित किया जाता है तो एनएचआरसी अपनी जिम्मेदारी निभाने से हिचकिचाएगी नहीं। ‘मीडिया और मानवाधिकार’ पर आयोजित एक कार्यशाला में बालकृष्णन ने कहा, ‘‘यदि इसे मंजूरी दी गई या जब एनएचआरसी को काम सौंपा गया तो मुझे यकीन है कि हम इसे सही तरीके से लेंगे और अपनी जिम्मेदारी निभाने की पूरी कोशिश करेंगे।’’

गौरतलब है कि सोमवार को केंद्रीय कैबिनेट ने ‘सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम (न्याय तक पहुंच एवं क्षतिपूर्ति) विधेयक 2013 को मंजूरी दी। मानवाधिकार हनन के मुद्दों को सामने लाने में मीडिया की भूमिका की सराहना करते हुए न्यायमूर्ति बालकृष्णन ने कहा कि एनएचआरसी ने मीडिया की खबरों के आधार पर गंभीर प्रकृति के 300 मामलों पर स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई की है। न्यायमूर्ति बालकृष्णन ने कहा, ‘‘मीडिया और सिविल सोसाइटी संगठन हमारे एंटिना हैं। लोगों से हमारा सीधा संपर्क नहीं रहता पर ये संस्थाएं समाज में काम करती हैं। मानवाधिकार हनन की कई घटनाएं सामने लाने पर मैं उनकी कोशिशों की सराहना करता हूं।’’


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