मोदी के इतिहास की जानकारी पर नीतीश ने ली फिर चुटकी

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Friday, December 20, 2013-11:41 AM

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने विरोधी और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर इशारा करते हुए कहा कि तक्षशिला जो पाकिस्तान में है, उसके बारे में भी लोग पाकिस्तान के बजाय बिहार कह देते हैं। यह इतिहास के बारे जो समझ होनी चाहिए, उसका अभाव है। पिछले 27 अक्तूबर को पटना के गांधी मैदान में आयोजित हुंकार रैली को भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने संबोधित करते हुए तक्षशिला को बिहार में बताने के साथ सिकंदर के गंगा किनारे तक आने तथा चंद्रगुप्त को मौर्य वंश के बजाये गुप्त वंश का बताया था। भारतीय ऐतिहासिक अभिलेख कमिटी के 61वें अधिवेशन का उद्घाटन करते हुए नीतीश ने मोदी की ओर इशारा करते हुए उनपर चुटकी लेते हुए कहा कि तक्षशिला जो पाकिस्तान में है, उसके बारे में भी लोग पाकिस्तान के बजाये बिहार कह देते हैं।

 इतिहास के बारे में जो समझ होनी चाहिये, उसका अभाव है। उन्होंने कहा कि इतिहास में दिलचस्पी होनी चाहिए और उनका स्वभाव है कि जब वे भ्रमण पर कहीं जाते हैं तो वहां पुराने जमाने की चीजों ्र उस समय के इतिहास, लोगों के रहन-सहन, कला एवं संस्कृति के बारे में जानकारी लेते हैं। नीतीश ने कहा कि जो कुछ भी हमारी पुरानी चीजें है, उसके बारे में जो काम होना चाहिये वह कम होता है। इतिहास के बारे में संवेदनशीलता बहुत कम है। उन्होंने कहा कि देश में अभिलेखों को रखने पर जोर नहीं दिया गया। अभिलेखों को ठीक ढंग से संरक्षित कर रखने का तरीका भी लोगों को मालूम नहीं था। ज्ञान को मौखिक रूप से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जाता था। 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि शिक्षा सीमित दायरे में रही और जिनके पास ज्ञान और शिक्षा थी उनका समाज मे बडा रुतबा था। लोक कथाओं के माध्यम से चीजें जन-जन तक पहुंची, कुछ के लिखित रिकार्ड नहीं है। सिंधु घाटी की सभ्यता सहित कई अन्य जानकारी खुदायी से मिली। उन्होंने कहा कि बिहार में अभिलेखागार को सुदृढ करने के लिये कई कदम उठाये गये हैं और यहां अभिलेखों को ठीक करने और विरासत को संजोकर रखने के लिये अंतर्राष्ट्रीय स्तर का संग्रहालय बनाया जा रहा है। नीतीश ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कोटेशन आमंत्रित कर विश्वस्तरीय संरहालय भवन का निर्माण तेजी से हो रहा है। लार्ड कंसलटेंट की सेवा भी ली गयी है। इतिहास के विभिन्न कालखण्डों के प्रदर्शों को इस म्यूजियम में सुसज्जित कर रखा जायेगा। उन्होंने कहा कि पटना संग्रहालय प्रसिद्ध संग्रहालय है पर वहां भी सभी प्रदर्शों को जगह के अभाव में ठीक से नहीं रखा जा रहा है।

बिहार के अन्य ऐतिहासिक विरासतों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय को अब तक वल्र्ड हैरिटेज में सम्मिलित नहीं किया गया है जिसपर उन्होंने देश .विदेश के विद्धानों का ध्यान आकृष्ट कराया है। उन्होंने कहा कि डाक्यूमेंटेशन का कार्य पहले से होना चाहिये। अपनी पुरानी चीजों के बारे में डाक्यूमेंटेशन कर रखा जाना चाहिेये। नीतीश ने कहा कि बिहार के ऐसे अनेक विषय है  जिन पर शोध कार्य होना चाहिये। अनुसंधान होते रहना चाहिये। नये-नये पहलूओं की खोज होनी चाहिये। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद के अभिलेखों को भी ठीक ढंग से रखना चाहिये। सभी अभिलेखों का डिजिटाइजेशन होना चाहिये। डिजिटाइजेशन के साथ हार्ड कापी को सुरक्षित रखें। पांडुलिपियों को भी सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जानी चाहिये।


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