बाल सुधार गृहों में कानून व्यवस्था सुनिश्चित हो : उच्च न्यायालय

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Friday, December 20, 2013-8:04 PM

नई दिल्ली: स्थानीय बाल सुधार गृहों में हिंसा की घटनाओं पर नियंत्रण करने में नाकाम रहने को लेकर अधिकारियों को फटकार लगाते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज सरकार और पुलिस को कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा जघन्य अपराधों में संलिप्त बच्चों को इनमें अलग रखने का निर्देश दिया।

मुख्य न्यायधीश एनवी रमण और न्यायमूर्ति मनमोहन की सदस्यता वाली पीठ ने किशोरों के हिंसक होने की हालिया घटना पर स्वत: संज्ञान लेने के बाद कहा, ‘‘कुछ न कुछ गड़बड़ है। व्यवस्था इसके लिए जिम्मेदार है। अराजकता नहीं हो। हम रोज-रोज हिंसा की इजाजत नहीं दे सकते। इसका मतलब है कि आप कुछ नहीं कर रहे हैं।’’

अदालत में मौजूद महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक राजीव काले ने इसके लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं और कई प्राधिकार होने को जिम्मेदार ठहराया। अदालत ने कहा कि स्थिति को मद्देनजर रखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक और दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी (उपायुक्त रैंक से नीचे नहीं) को सभी सुधार गृहों में कानून व्यवस्था की स्थिति को कायम रखने के लिए जिम्मेदार बनाते हैं। पुलिस आयुक्त 24 घंटों के अंदर इसके लिए अधिकारी नियुक्त करे।

काले ने दलील दी कि कई प्राधिकारों ने इन सुधारगृहों के प्रशासन में हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि इन वजहों से राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग, निगरानी समिति, बाल न्याय बोर्ड समिति और गैर सरकारी संगठन हालात पर नियंत्रण करने में सक्षम नहीं हैं। गौरतलब है कि मीडिया में आई एक खबर के मुताबिक 16 दिसंबर को बाल कैदियों का एक समूह करीब आठ घंटे तक हिंसा, तोडफ़ोड़ और आगजनी करने के बाद सुधार गृह से भाग गया था।


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