धारा 377 मुद्दे पर आरएसएस एवं भाजपा की भावनाओं पर सहमति

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Friday, December 20, 2013-8:54 PM

नई दिल्ली: कई मुस्लिम नेताओं ने धारा 377 के मुद्दे पर आरएसएस एवं भाजपा की भावनाओं से आज सहमति जताई जबकि कुछ नेताओं ने संप्रग सरकार को यहां तक चेतावनी दे डाली कि यदि उसने समलैंगिकता के खिलाफ आए उच्चतम न्यायालय के फैसले के विरूद्ध पुनरीक्षा याचिका दाखिल करने का कदम उठाया तो उसे 2014 के चुनावों में सबक सिखाया जायेगा।

पूर्व सांसद एवं आम आदमी पार्टी की कोर कमेटी के सदस्य इलियास आजमी ने कहा, ‘‘राहुल गांधी कांग्रेस में बहुमत की राय के विरूद्ध अपने निजी कारणों से कांग्रेस पर एजेंडा थोप रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस मुद्दे पर मुस्लिम भाजपा एवं आरएसएस के साथ हैं। इस मामले में सांप्रदायिकता एवं धर्मनिरपेक्षता का कोई सवाल नहीं हैं।’’

आजमी ने कहा कि सभ्य समाज में कोई स्वतंत्रता को संपूर्ण की तरह परिभाषित नहीं कर सकता। उन्होंने कहा, ‘‘यह केवल जंगल में ही हो सकता है। क्या संप्रग नेता एक नेता के निजी हित के लिए इस देश को जंगल बना देना चाहते हैं।’’ भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को वैध ठहराने वाले उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए ‘‘सेक्युलर कयादत’’ के संपादक कारी एम एम मजहरी ने कहा कि एक ही लिंग के लोगों के बीच विवाह का न केवल इस्लाम बल्कि दुनिया के सभी प्रमुख धर्मों के नियम विरोध करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पुनरीक्षा याचिका दायर करके संप्रग कैबिनेट अपनी ही कब्र खोदेगा।’’

नेशनलिस्ट लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष अरशद खान ने कहा कि यदि कांगे्रस उच्चतम न्यायालय के फैसले को पलटवाने की अपनी मंशा पर आगे बढ़ी तो सभी मुस्लिम संगठन तथा सामाजिक एवं राजनीतिक समूह एकजुट होकर कांगे्रस को लोकसभा चुनाव में एक सबक सिखायेंगे।


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