चुनावों के बाद भी नहीं मिटी हर्षवर्धन व गोयल में दरार

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Saturday, December 21, 2013-12:02 AM

जालंधर (पाहवा): दिल्ली में विधानसभा चुनाव सम्पन्न हुए तो उसके बाद भाजपा को सबसे अधिक उम्मीद थी। बेशक वहां पर मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार डा. हर्षवर्धन व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विजय गोयल के बीच सदभावना वाले हालात नहीं हैं लेकिन अब अगर दोबारा चुनाव होते हैं तो इस समस्या के हल के लिए पार्टी की तरफ से पुख्ता प्रबंध करने पर विचार चल रहा है।

जानकारी के अनुसार दिल्ली भाजपा तथा हाईकमान में गोयल तथा डा. वर्धन की जोड़ी तोडऩे पर इन दिनों काम चल रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अघर दिल्ली में दोबारा चुनाव होते हैं तो गोयल का पत्ता कटना तय है। सूत्र तो यह भी बता रहे हैं कि डा. हर्षवर्धन तथा गोयल के बीच छत्तीस के आंकड़े के कारण सीटों की संख्या कुछ कम रह गई। अगर दोनों में आपसी विरोध न होता तो भाजपा को अधिक सीटें मिल सकती थीं।

जानकारी के अनुसार गोयल की तरफ से चुनावों के बाद तथा परिणाम के बाद के कुछ जारी ब्यानों को लेकर बी पार्टी को परेशानी झेलनी पड़ी है। यहां तक कि कुछ ब्यानों को लेकर तो पार्टी को बाद में मीडिया के सामने आ कर सफाई देनी पड़ी है। वैसे परिणाम के बाद भाजपा के अंदर एक फैसला लिया गया था कि आम आदमी पार्टी के हर ब्यान पर जवाब देना जरूरी नहीं है तथा जितना हो सके ब्यान का जवाब देने से बचा जाए।

बीते मंगलवार को विजय गोयल ने एक बैठक बुलाई जिसमें चुनावी समीक्षा की जानी थी। इस बैठक से डा. हर्षवर्धन गायब रहे। बुधवार को जब डा. हर्षवर्धन ने पार्टी कार्यालय में पत्रकार सम्मेलान बुलाया तो वहां पर गोयल नहीं पहुंचे। वैसे चर्चा है कि डा. हर्षवर्धन को बैठक से ठीक पहले सूचना दी गई जिसके कारण वह बैठक में नहीं आ सके।

आम आदमी पार्टी के एक ब्यान पर गोयल ने ब्यान जारी करते हुए कह दिया था कि भाजपा आम आदमी पार्टी को रचनात्मक सहयोग देने के लिए तैयार है।  इसके बाद दिल्ली भाजपा को मीडिया के सामने जा कर गोयल के ब्यान में सुधार करना पड़ा। पार्टी रचनात्मक के मतलब को मीडिया के सामने ब्यां करती रही।

यही नहीं जिस दिन आम आदमी पार्टी  ने जिस दिन भाजपा को 18 स्वालों के लिए पत्र लिखा उसी दिन ने उक्त ब्यान मीडिया में जारी किया था जिसके बाद पार्टी की काफी किरकिरी हुई थी। अब पार्टी का एक गुट इसी विषय पर काम कर रहा है तथा संभावना है कि अगर दोबारा चुनाव होते हैं या लोकसभा चुनावों के आगमन से पहले दिल्ली भाजपा में कुछ बदलाव संभावित है।


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