उप्र में हर गर्भवती की होगी एचआईवी जांच

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Sunday, December 22, 2013-12:51 PM

लखनऊ: राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संस्थान (नाको) के नए दिशा निर्देश के अनुसार, उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पताल व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव के लिए आने वाली हर गर्भवती की एचआईवी जांच कराई जाएगी। इसके लिए इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात स्टाफ नर्स को टेस्टिंग किट उपलब्ध कराई जाएगी।

यही नहीं, स्टाफ नर्स को हर महिला की जांच का ब्योरा भी रजिस्टर में दर्ज करना होगा। इसके लिए नर्सों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। उप्र एड्स नियंत्रण सोसायटी की संयुक्त निदेशक (सूचना शिक्षा एवं संचार) डा. प्रीति पाठक ने बताया कि प्रदेश में अस्पतालों में 62 प्रतिशत प्रसव हो रहे हैं। उनमें भी सभी गर्भवती की प्रसव पूर्व एचआईवी जांच नहीं होती है। इससे मां से बच्चे में एचआईवी का संक्रमण नहीं थम पाता है।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संस्थान (नाको) के नए दिशा निर्देश के अनुसार, अब इमरजेंसी में सीधे पहुंचने वाली हर गर्भवती महिला की एचआईवी जांच होगी। स्टाफ नर्स को हर महिला की जांच का ब्योरा भी रजिस्टर में दर्ज करना होगा। डा. प्रीति ने कहा कि वह चाहती हैं कि हर एचआईवी ग्रस्त गर्भवती का प्रसव सरकारी अस्पताल में हो, ताकि समय पर मां व बच्चे को एंटी-रिट्रो वायरल ड्रग (एआरवी) दिया जा सके। उन्होंने कहा कि अब गर्भकाल के चौथे माह से गर्भवती को नि:शुल्क एआरवी दवाइयां दी जाएंगी, जिनसे मां से बच्चे में एचआईवी का संक्रमण रोका जा सकेगा।


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