मध्य प्रदेश में पुन: सफेद बाघ लाए जाने को लेकर एनटीसीए की मनाही

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Sunday, December 22, 2013-1:19 PM

नई दिल्ली: राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने मध्यप्रदेश में फिर से सफेद बाघ लाये जाने को लेकर अपनी मंजूरी देने से इंकार कर दिया है और कहा है कि उनका कोई ‘संरक्षण महत्व’ नहीं है। इस निर्णय के सामने आने के बाद इस दुर्लभ प्रजाति को हासिल करने के लिए  राज्य द्वारा किये जा रहे प्रयासों को झटका लगा है। यह निर्णय कुछ समय पहले एनटीसीए की तकनीकी कमेटी और मध्य प्रदेश वन विभाग के अधिकारियों की यहां हुयी एक बैठक में लिया गया।

 

बैठक के एक नोट के अनुसार कमेटी ने मध्य प्रदेश के मुख्य वन्यजीव संरक्षक द्वारा उठाए गए मुद्दे पर भारतीय वन्यजीव संस्थान के जवाब पर विचार किया। इसमें कहा गया है कि भारतीय वन्यजीव संस्थान पहले ही यह स्प्ष्ट कर चुका है कि सफेद बाघों को फिर से प्राकृतिक स्थान पर लाये जाने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह बाघ की अलग उप प्रजाति नहीं है। यह केवल रॉयल बंगाल टाइगर का एक अलग प्रकार है और इसका कोई संरक्षण महत्व नहीं है।

 

भोपाल निवासी वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत बैठक में हुई चर्चा की जानकारी हासिल की। दुबे ने कहा, ‘‘पर्यावरण और वन मंत्रालय को हस्तक्षेप करना चाहिए तथा एनटीसीए से इस मामले में फिर से विचार की अपील करनी चाहिए। हम लोग मंत्रालय को भी इस संबंध में लिखेंगे।’’ राज्य सरकार सीधी जिले में स्थित संजय बाघ अभयारण्य के लिए सफेद बाघ की एक जोड़ी लाने के लिए प्रयास करती रही है।

 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ओडिशा के अपने समकक्ष नवीन पटनायक को भी पत्र लिखकर नंदनकानन प्राणी उद्यान से राज्य में गोविंदगढ़ के नजदीक मुकुंदपुर में प्रस्तावित प्राणी उद्यान के लिए सफेद बाघों की एक जोड़ी मांगी थी। हालांकि ओडिशा से बाघ लाने के प्रयास सफल नहीं हो सके ।


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