मोदी की ‘गोएबल्स’ जैसी नीतियों के कारण ही राजस्थान में भाजपा जीती: गहलोत

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Sunday, December 22, 2013-1:37 PM

नई दिल्ली: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नरेंद्र मोदी पर अपने राज्य में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने का आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी के विचार भारतीय लोकतंत्र के लिए खतरा हैं। गहलोत ने कहा कि मोदी की ‘गोएबल्स’ जैसी नीतियों के कारण ही भाजपा राजस्थान में जीत हासिल कर सकी और कांग्रेस को आश्चर्यजनक तरीके से हार का सामना करना पड़ा। जर्मन नेता जोसफ गोएबल्स 20वीं सदी में एडोल्फ हिटलर के शासन में होने वाले अत्याचारों से जुड़ा था।गहलोत ने मोदी के तौर-तरीके को जर्मन नेता की नीतियों से जोड़ा।

62 वर्षीय पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘मुझे लगता है कि कोई सत्ता विरोधी लहर नहीं थी और अगर थी भी तो इतनी बुरी स्थिति नहीं होती। यह बहुत आश्चर्य की बात है।’ गहलोत ने जोर देते हुए कहा, ‘मोदी के विचार भारतीय लोकतंत्र के लिए खतरा हैं। यह कांग्रेस की हार नहीं बल्कि सांप्रदायिक ताकतों की जीत है।’ राजस्थान की 200 सदस्यीय विधानसभा के चुनावों में कांग्रेस का बहुत खराब प्रदर्शन देखने को मिला जहां पार्टी को केवल 21 सीटों से संतोष करना पड़ा। इससे पहले आपातकाल के बाद 1977 में हुए चुनाव में पार्टी को 41 सीटें मिली थीं। गहलोत ने कहा, ‘सोशल मीडिया के इस्तेमाल से लोगों में खासकर युवा पीढ़ी में माहौल को संाप्रदायिक करने के प्रयास किए गए। यह अनुचित तरीके से किया गया प्रहार था।’ 

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यह गोएबल्स के इस दुष्प्रचार की तरह है कि सौ बार झूठ बोलने से यह सच लगने लगता है। भाजपा और नरेंद्र मोदी ने इस तरीके से राजनीति की। उन्होंने झूठ और निराधार चीजों का प्रचार किया। यह देश के हित में नहीं है।’ मोदी पर राजस्थान में भी गुजरात जैसे तौर-तरीके अपनाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा ने गुजरात में एक भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया था और ऐसी चीजें की थीं जिसने हिंदुओं को एक तरह से सामूहिक तौर पर वोट देने के लिए भड़काया होगा। गहलोत ने कहा कि इन सबके अलावा महंगाई भी एक मुद्दा था। हालंाकि उन्होंने कहा कि एक तरफ महंगाई बढ़ी है वहीं लोगों की क्रय क्षमता में भी इजाफा हुआ। लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का नेतृत्व कौन संभालेगा, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि राहुल गांधी कांग्रेस के लिए प्रधानमंत्री पद की स्वाभाविक पसंद हैं।

गौरतलब है कि बतौर मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल के दौरान जनवरी में जयपुर चिंतन शिविर आयोजित कराने में गहलोत की बड़ी भूमिका रही थी जहां राहुल को पार्टी उपाध्यक्ष के तौर पर पदोन्नत किया गया था। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान विरोधियों द्वारा नेहरू-गांधी परिवार पर किये गये हमलों की भी निंदा की। गहलोत ने कहा, ‘‘गांधी-नेहरू परिवार पर हमले होते रहे जबकि यह भी सच है कि उन्होंने इलाहाबाद में आनंद भवन को राष्ट्र को समर्पित कर दिया। इस सच के बावजूद हमले होते रहे कि इस परिवार से कोई भी पिछले 25 साल से प्रधानमंत्री या मंत्री तक नहीं बना है।’

उन्होंने कहा कि इस परिवार की साख अभी तक लोगों के बीच बनी हुई है। इसलिए केवल उनकी छवि खराब करने के लिए अभियान चलाया गया। सीडी और किताबें बांटकर यह काम किया गया जिनमें दुष्प्रचार था। यह अनुचित हमला है। जाहिर तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘एक महिला को बहुत ही अभद्र भाषा के साथ निशाना बनाया जा रहा है जिसने प्रधानमंत्री पद तक छोड़ दिया। युवा पीढ़ी को गुमराह करना आसान है जो इस परिवार के बलिदान को नहीं जानती।’ उन्होंने कहा कि भाजपा अलग अलग मुद्दों पर सांप्रदायिक विभाजन के लिए जानी जाती है।

उनके मुताबिक, ‘वाजपेयी के समय अयोध्या का मुद्दा था। धर्मनिरपेक्ष ताकतों को इस तरह की राजनीति से उत्पन्न खतरे को समझना चाहिए। उन्हें खासतौर पर युवाओं को इस तरह की चीजों से दूर करने के प्रयास करने चाहिए।’ 2जी स्पेक्ट्रम जैसे घोटालों का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा, ‘गठबंधन के युग में सहयोगी भी गल्तियां करता है तो जिम्मेदार आपको ठहराया जाता है।’ गहलोत ने कहा कि वह पार्टी में किसी पद की चाहत नहीं रखते। उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस ने हमेशा से मुझ पर भरोसा किया है। मुझे तीन बार केंद्रीय मंत्री बनाया गया। एक बार इंदिरा गांधी ने, एक बार राजीव गांधी ने और एक बार पी वी नरसिंहराव ने। मैं तीन बार प्रदेश कंागे्रस अध्यक्ष रहा हूं और दो बार मुख्यमंत्री रहा हूं।’


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