भारत-अमेरिका संबंधों में प्रगति के लिए पारस्परिक विशेषाधिकार अहम : उमर

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Sunday, December 22, 2013-3:14 PM

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आज कहा कि यदि भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को आगे बढ़ाना है तो पारस्परिक विशेषाधिकारों को अहमियत देनी होगी तथा दोनों देशों को राजनयिक देवयानी खोबरागड़े के साथ हुई बदसलूकी के गंभीर मुद्दे का समाधान करने के लिए साथ साथ काम करने की जरूरत है। उमर ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘मुझे लगता है कि यदि संबंधों को आगे बढ़ाना है तो पारस्परिक विशेषाधिकार अहम होगा। यदि वे हमारे राजनयिकों के साथ अच्छा बर्ताव करते हैं, तो हम भी उनके राजनयिकों के साथ अच्छा बर्ताव करेंगे।’

उमर ने इस तथ्य पर अफसोस जाहिर किया कि हमने उन्हें विशेषाधिकार दे रखे थे जबकि वाशिंगटन भारतीय राजनयिकों के प्रति ऐसा ही शिष्टाचार नहीं दिखा रहा है। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि अमेरिका इस बात को मानना चाहिए कि यह महिला राजनयिक हैं और उनके साथ राजनयिक जैसा सलूक होना चाहिए।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि आप एक उदाहरण ले सकते हैं, जब मध्यम दर्जे के अमेरिकी अधिकारी भारत की यात्रा पर आते हैं तो हम उनके लिए सारे दरवाजे खोल देते हैं।

मेरा मतलब है कि अमेरिकी राजदूत शायद ही कभी इसके लिए पहले से समय लेते हों और शायद ही नई दिल्ली स्थित कार्यालय उनके लिए खुला नहीं रहता हो। वहीं, वाशिंगटन में पदस्थ भारतीय राजदूत के प्रति यही शिष्टाचार नहीं दिखाया जाता। राजनयिक मुद्दे पर सख्त रूख अख्तियार करने को लेकर उमर ने केंद्र की सराहना की। उमर ने कहा कि यह एक गंभीर मुद्दा है जिसे अमेरिका और भारत को साथ मिलकर सुलझाने की जरूरत है। ‘

मुझे लगता है कि यह पहला मौका है जब भारत ने इस तरह के मुद्दे पर एक सख्त रूख अख्तियार किया, जिसके बारे में मुझे लगता है कि हमें इसके लिए भारत सरकार की सराहना करनी चाहिए।’ उमर ने कहा, ‘मुझे लगता है कि पश्चिमी देशों के प्रेस में जिस तरह के बयान आ रहे हैं, वे उन्हें महसूस हो रहे इस बात के संकेत देते हैं कि भारत जैसा कोई देश अपने अधिकार के लिए उठ खड़े होने की कुव्वत रखता है।’


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