नई गाइडलाइन से ग्रामीण बच्चों का एडमिशन हुआ मुश्किल

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Sunday, December 22, 2013-3:51 PM

नई दिल्ली: नर्सरी एडमिशन के लिए जारी की गई नई गाइडलाइन से ग्रामीण इलाकों के लोग काफी नाराज हैं। नए नियम के मुताबिक ग्रामीण इलाकों के बच्चों का अच्छे और बड़े स्कूलों में एडमिशन नामुमकिन सा हो गया है। असल में ग्रामीण इलाकों में या तो अच्छे स्कूल नहीं है और यदि हैं भी तो वह 6 किलोमीटर की परिधि में नहीं आते हैं। ऐसे में उन्हें 70 अंक नहीं मिलेंगे और एडमिशन होना नामुमकिन सा हो जाएगा।

उपराज्यपाल ने नर्सरी एडमिशन की जो नई गाइडलाइन जारी की है, उससे बहुत से अभिभावक बहुत खुश हैं। मगर ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए यह गाइडलाइन अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाने का सपना तोडऩे वाली है। इससे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले गांव के बच्चों का दाखिला नामी स्कूलों में होना लगभग नामुमकिन सा हो गया है। नत्थूपुरा की बात करें तो यहां से कोई भी अच्छा स्कूल मॉडल टाऊन या पीतमपुरा में है,जो पंद्रह से बीस किलोमीटर है। बुराडी के लोग भी खासे परेशान हैं और शिक्षा विभाग को कोस रहे हंै।

मॉडल टाऊन यहां से सबसे नजदीक है, पर उसकी दूरी यहां से दस किलोमीटर है। यदि गांव के लोग अपने बच्चे को किसी अच्छे स्कूल भेजेंगे तो उनके 70 अंक तो सीधे ही काट लिए जाएंगे। इसके बाद एडमिशन नहीं हो पाएगा।यह स्थिति दिल्ली के कई गांवो में रहने वालों की है। अब गांव में रहने वाले लोग अपने बच्चों के एडमिशन के लिए अप्लाई करेंगे और दुआ मनाएंगे की शिक्षा विभाग का नियम बदल जाए। यदि नियम रहा तो उनके बच्चों का दाखिला संभव नहीं। नियम नहीं बदलने पर गांव वालों को गलियों में थोक के भाव खुले बिना स्कूलों में अपने बच्चों का एडमिशन कराना पड़ेगा । जिन स्कूलों का यह भी नहीं पता की उनकी मान्यता है भी या नहीं और टीचर्स क्वालिफाइड हैं या नहीं।


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