विधानसभा चुनाव में करारी पराजय के बाद मप्र में कांग्रेस की राह होगी जटिल

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Sunday, December 22, 2013-4:08 PM

भोपाल: मध्यप्रदेश में गत 25 नवम्बर को चौदहवीं विधानसभा के गठन के लिए हुए चुनाव में करारी पराजय झेलने के बाद प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के लिए आने वाले दिनों में राह बहुत कठिन और जटिल होने वाली है। वर्ष 2003 में लगातार दस साल तक सत्ता में रहने और भाजपा से पराजय का स्वाद चखने के बाद कांग्रेस इस राज्य में वर्ष 2008 के पिछले और अब 2013 के विधानसभा चुनाव में भी पराजित होकर सन्निपात की स्थिति में है और भाजपा ने यहां सत्ता की ‘हैट-ट्रिक’ लगाकर इतिहास रचा है।

 

भाजपा के हाथों दिसम्बर 2003 के विधानसभा चुनाव में पराजित होकर कांग्रेस को प्रदेश की कुल 230 में से 39 सीटें मिली थी, जबकि भाजपा ने 173 सीटें जीतकर भारी बहुमत से उमा भारती के नेतृत्व में अपनी सरकार बनाई थी। उमा को तिरंगे मामले में कर्नाटक की हुबली अदालत से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ी थी और उनके बाद बाबूलाल गौर एवं फिर शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बने, लेकिन नवम्बर 2008 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को पुन: पराजय झेलनी पड़ी, लेकिन सदन में उसकी सीटों की संख्या बढ़कर 39 से 71 हो गई।

 

अभी 25 नवंबर को हुए विधानसभा के ताजा चुनाव में कांग्रेस एक बार फिर 71 से सिमटकर 58 सीटों पर रह गई है और उसके कई दिग्गज नेता चुनाव हार गए हैं। इस बार पार्टी की पराजय के कई कारण हो सकते हैं लेकिन कांग्रेस के जिन नेताओं के बारे में कहा जाता रहा है कि वे कभी चुनाव नहीं हार सकते, उनके क्षेत्रों में भी कांग्रेस के उम्मीदवार असफल रहे हैं।

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