जानिए केजरीवाल का CM तक का सफर

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Monday, December 23, 2013-5:22 PM

नर्इ दिल्ली: देश की राजनीति में जनमानस से जुड़ने की अपनी खास शैली से देश के प्रमुख राजनीतिक दलों को सोचने पर मजबूर कर आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भारतीय राजनीति के केन्द्र दिल्ली में नया इतिहास रचा है। जन लोकपाल के लिए सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के आंदोलन से अलग होकर महज एक साल पहले पार्टी बनाने वाले केजरीवाल ने सभी राजनीतिक पंडितों के अनुमानों को झुठलाते हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपनी सूझबूझ, राजनीतिक चतुरता और साफगोई से अपने विचार रखकर जनता का ऐसा मन मोहा कि 15 साल से दिल्ली पर राज कर रही कांग्रेस को रसातल में पहुंचा दिया।

केजरीवाल ने  पन्द्रह वर्ष से सत्ता से दूर राजसुख भोगने को लालायित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बहुमत से चार कदम पहले ही रोक दिया। केजरीवाल ने यह साबित कर दिया कि सत्ता हासिल करने के लिए राजनीतिक अनुभव नहीं बल्कि सामाजिक सोच और आम आदमी की मानसिकता से जुडने की कला ही महत्वपूर्ण होती है।

सोलह अगस्त 1968 को हरियाणा के हिसार में गोबिन्द राम केजरीवाल और गीता देवी के घर जन्मे अरविंद ने बाल काल से ही अपनी चतुरता का लोहा मनवाना शुरु कर दिया था। देश के नामी गिरामी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खडगरपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने के बाद  केजरीवाल ने कुछ समय टाटा स्टील में नौकरी की। वह वर्ष 1989 में टाटा स्टील से जुडे़ और वर्ष 1992 में कंपनी को अलविदा कह दिया। उन्होंने कुछ समय कोलकाता के रामकृष्णन आश्रम और नेहरु युवा केन्द्र में बिताया।

इसके बाद सिविल सर्विसेज परीक्षा पास कर वर्ष 1995 में  केजरीवाल भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) से जुड़ गए। वर्ष 2000 में उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने दो वर्ष का सवेतन अवकाश लिया। वर्ष 2003 में वह फिर सेवा से जुडे लेकिन वर्ष 2006 में दिल्ली में संयुक्त आयकर आयुक्त के पद से नौकरी को अलविदा कह दिया।

हालांकि उनके त्यागपत्र को लेकर खासा विवाद भी हुआ। इस विवाद में जुर्माने की भरपाई के लिए उन्हें अपने एक मित्र से कर्ज भी लेना पड़ा। आईआरएस सेवा के प्रशिक्षण के दौरान ही केजरीवाल ने अपनी बैचमेट सुनीता से विवाह किया। केजरीवाल के  एक पुत्र और एक पुत्री है। केजरीवाल आमजन के लिए निरंतर संघर्षरत रहे। सूचना के अधिकार (आरटीआई) को देश में लागू कराने और अन्ना हजारे के जनलोकपाल का मसौदा तैयार करने में उनकी मुख्य भूमिका रही। अन्ना आंदोलन से नवम्बर 2012 में अलग होकर  केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी (आप) का गठन किया।

आप का 26 नवम्बर 2012 को दिल्ली में औपचारिक ऐलान  हुआ और केजरीवाल ने भ्रष्टाचार के आंदोलन को अपने साथियों मनीष सिसौदिया, संजय सिंह, गोपाल राय, कुमार विश्वास, प्रशांत भूषण और योगेन्द्र यादव के साथ नया रुप दिया। केजरीवाल ने दिल्ली को अपना केन्द्र बनाया और बिजली कंपनियों की मनमानी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस आंदोलन में उन्हें लोगों का व्यापक समर्थन मिला और उनकी लोकप्रियता में लगातार इजाफा होता रहा।

केजरीवाल ने मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ चुनाव लड़ने की घोषणा करके सबको चौंका दिया। राजनीतिक पंडित उनके इस फैसले को लेकर अचंभित हो गए। ऐसी चर्चा होने लगी कि केजरीवाल ने अपना राजनीतिक सफर शुरु होने से पहले ही खत्म कर लिया लेकिन दिसम्बर में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। उन्होंने नर्इ दिल्ली विधानसभा सीट से दीक्षित को 23 हजार से अधिक मतों से पराजित कया और उनकी पार्टी ने 70 सदस्यीय विधानसभा में 28 सीटें हासिल की।  2006 में रमन मैगसेसे पुरस्कार से नवाजे गए  केजरीवाल ने 'स्वराज' नाम से एक पुस्तक भी लिखी है। यह पुस्तक 2012 में प्रकाशित हुई।


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