‘आप’ के वादे कितने व्यावहारिक?

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Monday, December 23, 2013-10:27 PM

नई दिल्ली : दिल्ली की जनता ने आम आदमी पार्टी (आप) को उसके वादों पर विश्वास करके दिल्ली विधानसभा चुनाव में 28 सीटें दे दीं, जिसके बल पर दिल्ली में ‘आप’ की सरकार बनाने जा रही है। मगर सवाल यह है कि ये वादे कितने व्यावहारिक हैं।

‘आप’ द्वारा किए गए वादों में आम जनमानस को लुभाने वाले तीन प्रमुख वादे हैं- बिजली की दरों में भारी कटौती, प्रतिदिन प्रत्येक परिवार को 700 लीटर पानी की आपूर्ति करना और सभी अनियमित बस्तियों का नियमितिकरण।

वास्तव में दिल्ली की जनता इन्हीं चीजों के लिए लालायित भी थी, लेकिन एक वर्ष पुरानी ‘आप’ के लिए इन वादों को पूरा करना नाको चने चबाने के समान होगा। ‘आप’ के लिए यह किसी लिटमस टेस्ट के समान होगा। साथ ही कर्म और वचन के बीच फासला न रहे, इस पर ध्यान रखना होगा।

पिछले दो वर्षों में कई बार काफी तेजी से बढ़ी बिजली की दरों ने दिल्लीवासियों को सर्वाधिक परेशान कर रखा था। ऐसे में इसमें 50 फीसदी की कटौती ने ‘आप’ को दिल्ली वासियों के बीच तेजी से लोकप्रियता दिला दी। दिल्ली के पूर्व प्रधान सचिव शक्ति सिन्हा ‘आप’ में लगातार ‘निरंतरता’ का अभाव देखते हैं।

सिन्हा ने आईएएनएस से कहा, ‘‘बिजली की दरों का निर्धारण दिल्ली विद्युत नियामक आयोग करता है। दिल्ली सरकार सिर्फ निर्देश दे सकती है। बिजली दरों में कमी लाने के एकमात्र उपाय लोगों को बिजली दरों में छूट देना है।’’

सिन्हा ने बताया, ‘‘दिल्ली के विकास के लिए 15,000 करोड़ रुपये का बजट है, जिसमें चार से पांच हजार करोड़ रुपये बिजली आपूर्ति पर ही खर्च हो जाते हैं।’’ केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय में सचिव रह चुके अनिल राजदान ने भी इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि ‘आप’ चुनाव में जनता से किए बड़े-बड़े वादे कैसे पूरी करेगी।

राजदान ने कहा कि बिजली की दरों में कटौती के लिए ‘आप’ की कार्ययोजना को वह देखना चाहेंगे। राजदान ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि बिजली आपूर्ति कंपनियों पर जबरन लगाम लगाकर ही ‘आप’ बिजली की दर कम करने का अपना वादा पूरा कर सकती है।

‘आप’ ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में पेयजल की समस्या को सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। जनगणना-2011 के अनुसार, दिल्ली में 1.7-1.8 करोड़ लोगों को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पाती। जल मामलों के विशेषज्ञ हिमांशु ठक्कर ‘आप’ द्वारा रोज हर परिवार को 700 लीटर जल की आपूर्ति करने के वादे को पूरा हो सकने योग्य बताया।

ठक्कर ने बताया, ‘‘दिल्ली जल बोर्ड दावा करती है कि वह प्रतिदिन हर परिवार को 200 लीटर जल की आपूर्ति करती है। इसे बढ़ाकर 700 लीटर तक पहुंचाने के लिए अवसंरचना को बेहतर बनाने की जरूरत होगी। लीकेज को बंद करना पड़ेगा।’’

दिल्ली में प्रतिदिन तकरीबन 1,10 करोड़ गैलन जल की खपत होती है। आधिकारिक तौर पर इसमें पांच करोड़ गैलन की कमी रह जाती है, हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि इससे कहीं अधिक जल की कमी रह जाती है। अनियमित बस्तियों का नियमितिकरण ‘आप’ के लिए एक और बहुत बड़ी दुश्वारी साबित होगी।

बस्ती योजनाकार एवं गृह निर्माण विशेषज्ञ प्रेम सिंह ने आईएएनएस को बताया, ‘‘यह राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है। यह उनके लिए बहुत बड़ी चुनौती होगी। किसी अनियमित बस्ती के नियमितिकरण के लिए दिल्ली में अनेक प्राधिकरणों से होकर गुजरना पड़ता है।’’वास्तविकता यह है कि कभी कांग्रेस का वोटबैंक रहीं ये अनियमित बस्तियां ही ‘आप’ की जीत का आधार बनीं।
 


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