गर्भाशय कैंसर की जांच के लिए बना पहला स्वदेशी उपकरण

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Monday, December 23, 2013-10:51 PM

नई दिल्ली : देश में हर साल 74,000 से अधिक महिलाओं की मौत की वजह बनने वाले गर्भाशय के कैंसर की जांच एवं इसका जल्द पता लगाने के लिए भारत ने अपना पहला स्वदेशी उपकरण पेश किया है।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित कम लागत वाला ‘एवी-मैगनीविजुअलाइजर’ उपकरण पेश करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यह किशोरियों एवं महिलाओं में होने वाले गर्भाश्य के कैंसर का जल्द पता लगाने में मदद करेगा, जिससे कई जिंदगियां बचाई जा सकेंगी।

आईसीएमआर के अंतर्गत काम करने वाले नोएडा स्थित कोशिका विज्ञान एवं कैंसर निवारक संस्थान (आईसीपीआ) द्वारा डिजायन की गई है। इस उपकरण की लागत 10,000 रुपए है। आजाद ने कहा, मैं बेहद खुश हूं और अत्याधुनिक उत्पाद के विकास में शामिल वैज्ञानिकों को बधाई देता हूं। मुझे उम्मीद है कि गर्भाशय के कैंसर का जल्द पता लगाने एवं जांच में मददगार बेहद कम लागत वाला यह उपकरण अगले आठ महीने में बाजार में उपलब्ध होगा।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस उपकरण की मदद से गर्भाशय के कैंसर का शुरआती चरण में ही पता लगाया जा सकेगा, जिससे इसका उपचार और अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा। यह उपकरण सबसे पहले जिला एवं उप जिला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएमसी) एवं इसके बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध कराया जाएगा।

गर्भाशय का कैंसर ज्यादातर विकासशील देशों में कैंसर से होने वाली महिलाओं की मौत का मुख्य कारण है। भारत में प्रत्येक वर्ष गर्भाशय के कैंसर के लगभग 1.32 लाख मामले सामने आते हैं और इस कारण हर साल 74,000 महिलाओं की मौत हो जाती है।
 


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