जन्मदिन पर ही क्यों याद आतें है वाजपेयी?

  • जन्मदिन पर ही क्यों याद आतें है वाजपेयी?
You Are HereNational
Wednesday, December 25, 2013-10:45 AM

रुड़की: यूं तो अटलबिहारी बाजपेयी एक ऐसे सर्वमान्य नेता रहे है जिनका सम्मान देशभर की राजनीतिक पार्टिया और नेता करते रहे है। परन्तु जिस भारतीय जनता पार्टी को अटलबिहारी वाजपेयी ने अपने खून से सींचा और भाजपा गठबन्धन की केन्द्र में सरकार बनाकर उसका नेतृत्व किया उस भाजपा ने अटलबिहारी वाजपेयी को लगभग पूरे साल भुलाये रखा और नरेंद्र मोदी के रंग में रंग कर सन 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत के सब्जबाग देखती रही है। जिसके लिए कही न कही भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह और उनकी पार्टी के शीर्ष पदाधिकारी भी जिम्मेदार है जिन्होने अपने इस एक मात्र सर्वमान्य नेता की या तो खैर खबर नही ली या फिर उस खैर खबर को आम जनता तक पहुंचाने की कौशिश नही की। इसी कारण वर्षभर पूर्व प्रधानमन्त्री अटलबिहारी वाजपेयी गुमनामी में रहे और कही होर्डिगं या मीडिया तक में कही अटलबिहारी वाजपेयी का चेहरा सामने नही लाया गया।

हो सकता है पूर्व प्रधानमन्त्री अटलबिहारी वाजपेयी का स्वास्थ्य ठीक न हो और उन्हे वर्षभर आराम की जरूरत रही हो परन्तु देश की जनता जिनकी नुमायंद्गी अटलबिहारी वाजपेयी ने प्रधानमन्त्री के रूप में की है, को यह जानने का बराबर हक है कि देश का पूर्व प्रधानमन्त्री किस स्थिति में है और उन्हे क्या बीमारी है तथा उनका उपचार किस चिकित्सक के द्वारा किस अस्पताल में कराया जा रहा है? यह गम्भीर विषय है कि साल भर में भाजपा ने किसी भी बडे़ अवसर पर अपने इस सबसे बडे़ सर्वमान्य नेता को आम जनता के सामने लाने की कौशिश नही की। जबकि पूर्व प्रधानमन्त्री अटलबिहारी वाजपेयी के स्वास्थ्य को लेकर हर कोई चिंतित है और देश की जनता चाहती है कि उनके बारे में नियहमत स्वास्थ्य बुलेटिन अन्य बडे़ नेताआें की तरह जारी किये जाये ताकि अटल बिहारी वाजपेयी की हालत से देश की जनता समय समय पर वाकिफ हो सके। भारतीय जनता पार्टी पूर्व प्रधानमन्त्री अटलबिहारी वाजपेयी का जन्म दिन देशभर में मना रही है इसके लिए बडे़ बड़े कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे है। लेकिन पूरे सालभर भाजपा को अपने इस सर्वमान्य नेता की याद क्यों नही आई?

भाजपा के किसी भी राजनीतिक कार्यक्रमों में अटलबिहारी वाजपेयी का चित्र क्यों दिखाई नही दिया या फिर उन्हे जनता के सामने लाने की कौशिश क्यों नही की गई। इससे साफ लगता है भाजपा उसी नेता को तवज्जो देती है जो उसके काम का हो, चूंकि पूर्व प्रधानमन्त्री अटलबिहारी वाजपेयी अब कोई काम करने लायक नही रह गए है इस कारण भाजपा ने उन्हे भूला दिया है और चूंकि गुजरात के मुख्यमन्त्री नरेंद्र मोदी भाजपा को केन्द्र में सत्ता दिला सकते है इस कारण भाजपा वाजपेयी जैसे नेताआे को भूल नमो नमो का जाप करने में लगी है। हालाकि अटलबिहारी वाजपेयी की तरह ही पूर्व उपप्रधानमन्त्री लालकृष्ण आडवाणी की पूछ भी भाजपा में समाप्त प्राय हो गई है। सुषमा स्वराज,अरूण जेटली,रविशंकर जैसे दिग्गज भी जरूरत पडऩे पर ही पूछे जा रहे है। फिलहाल पहले नम्बर पर नरेंद्र मोदी और दूसरे नम्बर पर भाजपा के अध्यक्ष राजनाथ सिंह ही भाजपा में सर्वे सर्वा नजर आ रहे है। एेसे में भाजपा अटलबिहारी वाजपेयी जैसे पितामह को भूलाकर और लालकृष्ण आडवाणी,सुषमा स्वराज,रविशंकर,अरूण जेटली जैसे नेताआे की अनदेखी करके कैसे मिशन 2014 फतेह करेगी यह समझ से परे है।

खैर यह भाजपा का अन्दरूनी मामला है कि वह अपने नेताआे को तवज्जो दे या न दे परन्तु पूर्व प्रधानमन्त्री अटलबिहारी वाजपेयी पूर्व प्रधानमन्त्री होने के नाते भाजपा की नही इस देश की विरासत है जिनकी समुचित देखभाल हो और उन्हे प्रर्याप्त सम्मान मिलता रहे इसकी जानकारी रखने का हक उस आम जनता को है जिनकी नुमायंद्गी प्रधानमन्त्री के रूप में अटलबिहारी वाजपेयी कर चुके है। पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी दीर्घायु रहे और स्वस्थ रहे यही पूरा देश चाहता है। साथ ही उनके स्वस्थ से देशभर की जनता को समय समय पर अवगत कराया जाता रहेगा तो देश की जनता अपने इस नेता की हालत को जानकर सन्तुष्ट हो सकेगी। भारतीय जनता पार्टी को भी अपने राजनीतिक स्वार्थ को परे रखकर सिर्फ जन्मदिन पर पूर्व प्रधानमन्त्री अटलबिहारी वाजपेयी को याद करने के बजाए उन्हे हर रोज याद रखा जाए तथा उनकी सेवा और सम्मान को बनाये रखा जाए तभी अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मदिन मनाना भाजपा के लिए सार्थक माना जा सकता है।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You