राष्ट्रपति ने किया राष्ट्र को सुदृढ़ बनाने का आह्वान

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Wednesday, December 25, 2013-11:51 PM

लखनऊः राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सभी भाषी भाषाओं का आह्वान किया है कि हम सब मिलकर राष्ट्र को सुदृढ़ बनाएं। श्री मुखर्जी ने आज इलाहाबाद में आयोजित निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन के अधिवेशन के उद्घाटन भाषण में कहा कि मनुष्य की चेतना में ही द्वन्द, हर्ष, विषाद, हताशा, आकर्षण एवं प्रतिकर्षण होता है और उसे साहित्य में व्यक्त किया जाता है।

पाठक उसी में खुद को ढूंढता है तब साहित्य व्यक्तिगत न-न रहकर सार्वजनिक हो जाता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के विकास के लिए राष्ट्र एवं समाज का कुछ दायित्व होता है। राष्ट्र ही व्यक्ति के विकास के लिए जिम्मेदार होता है। मनुष्य हमेशा अमृत ढूंढता है और वह साहित्य से ही प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति की मुख्य विशेषता अनेकता में एकता है। राष्ट्रपति ने कहा कि वह साहित्यकार तो नहीं हैं लेकिन साहित्य में उनकी गहरी रूचि है।

वह बचपन से ही निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन की खबरें अखबारों में पढा करते थे। बाद में उन्होंने जमशेदपुर में पहली बार अधिवेशन का उद्घाटन किया था और वही से वह सम्मेलन से सीधे जुड गए थे। श्री मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने कहा था कि एक समय आएगा जब राष्ट्रीय एकता की जिम्मेदारी इस सम्मेलन को लेनी होगी। इस मौके पर राज्यपाल बी.एल.जोशी भी उपस्थित थे।


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