खुलेगा 15 सालों का कच्चा चिठ्ठा

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Thursday, December 26, 2013-12:53 PM

नई दिल्ली (सतेन्द्र त्रिपाठी): आप पार्टी की सरकार क्या कांग्रेस के 15 साल के शासनकाल में हुए कथित घोटालों की फाइलें खंगालेगी। इसमें सबसे बड़ा मामला तो बिजली के निजीकरण में हुई अनियमितता का है। अनधिकृत कालोनियों को प्रोविजनल सर्टिफिकेट देने में हुई गड़बड़ी सामने आ सकती है। जल बोर्ड के टैंकर, सी.एन.जी. बसें व कम्प्यूटरों की खरीद में हुई धांधली के आरोप भी सरकार पर लगते रहे हैं।

बिजली के निजीकरण में हुई अनियमितता का मामला तो विधायकों की पीएसी (पब्लिक एकाऊंट कमेटी) में भी उठा था। इस कमेटी के चेयरमैन उस वक्त विधायक डॉ.एस.सी. वत्स थे।  इसके अलावा 1639 अनधिकृत कालोनियों को नियमित करने का मामला भी गंभीर है। इनमें से 1218 को प्रोविजनल सर्टिफिकेट दिए गए। लेकिन आरोप लगे कि 150 कालोनियों तो केवल कागजों में है। जल बोर्ड में टैंकर घोटालों पर भी भाजपा ने बहुत शोर मचाया था।

इसके साथ ही जल बोर्ड सीवेज बिछाने के लेकर हुए अरबों के घोटाले की जांच दिल्ली सरकार की ही भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के पास पहुंची थी। शाखा की जांच की आंच सरकार तक पहुंचने से पहले ही वहां तैनात अतिरिक्त आयुक्त डॉ.एन.दलीप कुमार को वहां से हटा दिया गया। मामला अदालत के जरिए अब सी.बी.आई. तक पहुंचा हुआ है।

सी.एन.जी. की बसों पर बवाल मचा। आरोप लगे कि 18 लाख की बस 60 लाख में खरीदी गई। कॉमनवैल्थ में कनॉटप्लेस में ही सुधार के नाम पर 70 करोड़ रुपये का बजट 700 करोड़ तक पहुंच गया। दिल्ली सरकार में कम्प्यूटरों की खरीद में हुए घोटाले पर खूब हंगामा हुआ था। वजीराबाद में सिग्नेचर ब्रिज निर्माण प्रक्रिया में भी घोटाले का आरोपों लगा। इसके  नाम पर भी बवाल उठा।


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