सल्लू मियां ही नहीं, मिर्जा गालिब का भी है आज जन्मदिन

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Friday, December 27, 2013-4:04 PM

जौनपुर: मशहूर शायर मिर्जा असदुल्लाह खां (गालिब) की आज 216वीं जयंती हैं। आज सलमान खान का जन्मदिन बड़े ही जोर-शोर से मनाया जा रहा और सोशल साइट्स पर भी सल्लू मियां को जन्मदिन की बधाईयां दी जा रही हैं लेकिन कुछ ही लोगों को पता होगा कि आज ही के दिन मस्तमौला शायर मिर्जा गालिब भी पैदा हुए थे। मिर्जा गालिब खड़े-खड़े गज़लें बनाते थे और ऐसे पढ़ते थे कि महफिलों में भूचाल-सा आ जाता था।

ये इश्क़ नहीं आसां, बस इतना समझ लीजिए/इक आग का दरिया है और डूबकर जाना है' शेर तो हर आशिक के जुबानी आज भी है। मिर्ज़ा असदुल्लाह ख़ां ग़ालिब पुरानी दिल्ली के रहने वाले थे और बहादुर शाह जफ़र के शासनकाल से थे। बहादुर शाह जफ़र के शाही कवि ज़ौक थे जो कि ग़ालिब साहब से ईर्ष्या करते थे क्योंकि बहादुर शाह जफ़र भी मिर्जा गालिब को सुनना पंसद करते थे।

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है
तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़े-ग़ुफ़्तगू क्या है

न शोले में ये करिश्मा, न बर्क़ में ये अदा
कोई बताओ कि वो शोख़े-तुंद-ख़ू क्या है
गालिब के शेर आज भी लोगों के दिलों को छू जाते हैं।


गालिब के शेरों को फिल्मी जगत में भी काफी तरजीह दी गई। फिल्म जगत में गालिब के शेरों का अपना अलग ही रुतबा रहा। हिन्दी फिल्मों के गुलजार एक प्रसिद्ध गीतकार हैं। इसके अतिरिक्त वे एक कवि, पटकथा लेखक, फि़ल्म निर्देशक तथा नाटककार भी हैं।  गुलजार साहब भी गालिब के शेरों के दीवाने थे और उनकी जुबां पर भी गालिब के अशआर रहते थे।

उनके देखे से जो आ जाती है चेहरे पर रौनक
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है

हैं और भी दुनिया में सुखऩवर बहुत अच्छे
कहते हैं कि ग़ालिब का अंदाज़-ए-बयां और
-गुलज़ार


आज भी गालिब की गजले नई ही लगती हैं और गुलजार ने उन्हें बड़े ही बढिय़ा ढंग से लोगों के सामने पेश किया था।


ग़ालिब के चंद अशआर
इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया
वरना हम भी आदमी थे काम के

हमको उनसे वफा की है उम्मीद
जो नहीं जानते वफा क्या है

कोई मेरे दिल से पूछे तेरे तीरे-नीमकश को
ये ख़लिश कहां से होती, जो जिगर के पार होता

उत्तर प्रदेश में जौनपुर जिले के सरांवा गांव के शहीद लाल बहादुर गुप्त स्मारक पर हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी एवं लक्ष्मीबाई ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने आज मशहूर शायर मिर्जा असदुल्लाह खां (गालिब) की 216वीं जयंती मनाई गई। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने शहीद स्मारक पर मोमबत्ती एवं अगरबत्ती जलाकर दो मिनट का मौन रखा तथा शायर.ए.आजम मिर्जा गालिब को श्रद्धांजलि दी।

 

कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए लक्ष्मीबाई बिग्रेड की अध्यक्ष मंजीत कौर ने कहा कि देश के मशहूर शायर मिर्जा असदुल्लाह खां ‘गालिब’ का जन्म 27 दिसम्बर 1797 को उत्तर प्रदेश के आगरा में हुआ था। आगरा शहर के बाजार सीताराम की गली कासिम जान में स्थित हवेली में गालिब ने अपनी जिन्दगी का लम्बा समय गुजारा है। इस हवेली को संग्रहालय का रुप दे दिया गया है जहां पर गालिब का कलाम भी देखने को मिलता है। प्यार से उन्हें लोग मिर्जा नौशा के नाम से पुकारते थे। वह उर्दू, फारसी अदब के असीम शायर थे।
 

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