दंगा विरोधी कानून पर नाकाम रही केंद्र सरकार

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Friday, December 27, 2013-9:16 PM

नई दिल्ली : केंद्र सरकार इस साल वक्फ संपत्तियों की हिफाजत और बेहतर प्रबंधन के लिए संशोधित विधेयक को पारित कराने में कामयाब रही तो देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं के बावजूद वह दंगों के खिलाफ सर्वसम्मति से एक सख्त कानून बनाने में नाकाम रही।
 
इस साल संसद के दोनों सदनों में वक्फ संशोधन विधेयक को पारित किया गया और इसे कानून की शक्ल देकर लागू भी कर दिया गया। इस संशोधित कानून में वक्फ संपत्तियों की हिफाजत तथा बेहतर प्रबंधन को लेकर प्रावधान किए गए हैं। गैर कानूनी कब्जों को हटाने को लेकर भी कड़े प्रावधान हैं।

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री के. रहमान खान ने इसे सरकार की बड़ी कामयाबी करार देते हुए कहा कि वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और गैरकानूनी कब्जों को हटाने में इस नए कानून से काफी मदद मिलेगी। केंद्र सरकार ने केंद्रीय वक्फ विकास निगम स्थापित करने की भी पहल की और इसका काम अंतिम दौर में चल रहा है। यह निगम वक्फ संपत्तियों को विकसित करने की दिशा में काम करेगा।

वक्फ पर कामयाब रहने वाली केंद्र सरकार अपने चुनावी वादे के मुताबिक सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ कानून नहीं बना पाई। सांप्रदायिक एवं सुनियोजित हिंसा विधेयक को लेकर मुख्य विपक्षी भाजपा तथा कुछ दूसरे दलों ने विरोध किया। उनका विरोध विधेयक के उस प्रावधान को लेकर है जिसमें दंगों की स्थिति में केंद्र के दखल की बात की गई।

भाजपा और कुछ दूसरे राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया कि यह विधेयक देश के संघीय ढांचे के खिलाफ है क्योंकि कानून-व्यवस्था पूरी तरह से राज्य का विषय होता है। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने इस संबंध में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कुछ राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र भी लिखा।

सांप्रदायिक हिंसा विरोधी कानून की मांग ने इस साल कई स्थानों पर दंगों के बाद जोर पकड़ लिया। सबसे ज्यादा सांप्रदायिक दंगे उत्तर प्रदेश में हुए जहां समाजवादी पार्टी की सरकार है। सबसे भीषण दंगा इस साल सितम्बर की शुरूआत में मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में हुआ जिसमें 60 से अधिक लोगों की जान गई और हजारों लोग बेघर हो गए।

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और दूसरे स्थानों पर हुए दंगों को लेकर सियासी गलियारों में खूब बहस हुई और आरोप प्रत्यारोप का दौर भी चला। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने साल के आखिर में मुजफ्फरनगर जाकर उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार को जमकर कोसा तो इसके बाद मुलायम ने पलटवार किया और इसी क्रम में एक विवादास्पद बयान भी दिया।

उन्होने कहा कि मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों के लिए बनाए गए राहत शिविरों में अब कोई पीड़ित नहीं रह रहा है। आप चाहे पता लगा लें। ये वो लोग हैं जो षड्यंत्रकारी हैं। यह भाजपा और कांग्रेस ने षड्यंत्र किया है। भाजपा और कांग्रेस के लोग रात में जाकर उनसे कहते हैं कि बैठे रहो, धरना दो, लोकसभा चुनाव तक यह मुद्दा बनाए रखो।


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