अब कहां ले जाऊं बच्चों को, रेलवे ने उजाड़ा हमारा घर

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Saturday, December 28, 2013-1:23 PM

नई दिल्ली (सज्जन चौधरी): अपने घर में बच्चा पैदा होने पर 2 महीने तक जच्चा-बच्चा को घर से बाहर नहीं निकलने देते और हमारा घर उजाड़ गए। ये कहना था मानसरोवर पार्क में रेलवे द्वारा उजाड़ी गई झुग्गियों में रहने वाली सोनिया का। सोनिया ने वीरवार को एक बेटी को जन्म दिया था। वीरवार को रेलवे की ओर से जमीन खाली करवाने की कार्रवाई में उसकी झुग्गी तोड़ दी गई।

सोनिया और उसका पति दोनों अपाहिज हैं और अब दोनों के पास रहने का ठिकाना नहीं है। खुले आसमान के नीचे सोनिया एक अपनी बेटी को छाती से लगाए पड़ी है। यही हाल ङ्क्षबदिया का भी है। वीरवार शाम 7 बजे ङ्क्षबदिया ने लड़के को जन्म दिया। वीरवार से ही वह भी अपने बच्चे के साथ ठंड में सिकुड़ रही है। रेलवे की कार्रवाई में इनके घर का सामान तक तबाह हो गया है, न खाने को बर्तन हैं और न ही पकाने को खाना। अब ऐसी ठंड में सिर पर छत भी नहीं है।

हैरान करने वाली बात यह है कि यहां से उजाड़ दिए गए परिवारों के पास वोटर कार्ड, राशन कार्ड, आधार कार्ड समेत तमाम सरकारी कागजात हैं लेकिन रेलवे की ओर से आए तोड़-फोड़ दस्ते ने इन दस्तावेजों को मानने से इंकार कर दिया। सवाल उठता है कि अगर ये झुग्गियां अवैध थी तो सरकार ने इन लोगों को वोटर कार्ड और आधार कार्ड क्यों दिए।

पूर्वी दिल्ली के मानसरोवर पार्क स्थित लाल बाग, श्रीराम नगर की झुग्गियों को हटाने की कार्रवाई की गई थी। रेलवे की इस जमीन पर पिछले 20 साल से झुग्गियों में लोग रह रहे थे। रेलवे ने स्टोर बनाने के लिए 150 से ज्यादा झुग्गियों पर कार्रवाई की, जिसमें रहने वाले 165 परिवार बेघर हो गए हैं। इनमें से ज्यादातर कूड़ा बीनने और रिक्शा चलाने का काम करते हैं। रेलवे की ओर से की गई कार्रवाई में इन सभी लोगों का आशियाना उजड़ गए। लोगों की शिकायत है कि रेलवे बिना कोई जानकारी या नोटिस दिए सीधे कार्रवाई कर दी जिससे लोगों को अपना सामान हटाने का समय भी नहीं मिला।

हैरान करने की बात यह है कि इस पूरी कार्रवाई में रेलवे ने अपनी जमीन के साथ-साथ दिल्ली मैट्रो की जमीन पर भी कार्रवाई की। जो झुग्गियां तोड़ी गई हैं उनमें से लगभग आधी दिल्ली मैट्रो की जमीन पर थी। दरअसल जिस जमीन पर ये कार्रवाई हुई वहां मैट्रो की ओर से पिलर लगाए गए हैं। लोगों का कहना है कि रेलवे अधिकारियों बताया भी गया कि यह जमीन दिल्ली मैट्रो की है लेकिन अधिकारियों ने उनकी एक नहीं सुनी।


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