आप को समर्थन पर कांग्रेस की मुहर

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Saturday, December 28, 2013-3:07 PM

नई दिल्ली (अशोक शर्मा): ऊहापोह की स्थिति के बावजूद कांग्रेस ने सरकार गठित करने लिए आम आदमी पार्टी को समर्थन देने का फैसला किया है। पिछले कई दिनों से विधायकों के बीच इस मसले पर जद्दोजहद चल रही थी। ऐसे संकेत भी मिल रहे थे कि कांग्रेस आप को समर्थन के से पीछे हट सकती है। लेकिन हाईकमान के निर्देश का पालन करते हुए कांग्रेस के सभी विधायकों ने सुर में सुर मिलाते हुए बहुमत के दौरान आप का साथ देने पर ही मुहर लगा दी है।

याद रहे कि दिल्ली में त्रिशंकु  विधानसभा की स्थिति उत्पन्न होने के बाद भाजपा ने सरकार बनाने से साफ मना कर दिया था। उसके बाद आप ने सरकार बनाने के लिए उपराज्यपाल को न्यौता भेजा था। जनता से रायशुमारी करने के बाद आप के नेता ने दिल्ली में सरकार बनाने की बात कह दी थी। उसी दौरान कांग्रेस के दिल्ली प्रभारी ने जल्दबाजी में एक पत्र तैयार कर कह दिया था कि हम सरकार बनाने के लिए आप को बिना शर्त देने के लिए तैयार हैं। लेकिन उसके बाद कांग्रेस में इसका विरोध शुरू हो गया।

विधायकों ने भी बैठकों के दौरान अपना गिला-शिकवा व्यक्त किया था। कुछ दिन पहले दिल्ली के एक पूर्व मंत्री रमाकांत गोस्वामी ने पार्टी हाईकमान तक से आप को समर्थन के मुद्दे पर पुनर्विचार करने की अपील की थी। यानि कांग्रेस के समर्थन को लेकर तरह-तरह की अफवाहें उडऩी शुरू हो गई थीं। यहां तक समर्थन को लेकर कांग्रेस के विधायक दो गुटों में बंट गए थे। इस विस्फोटक स्थिति से निपटने के लिए पार्टी के कई वरिष्ठ नेता आपस में विचार-विमर्श कर रहे थे।

इसे लेकर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के कार्यालय में प्रदेश के मुखिया अरविंदर सिंह लवली ने शुक्रवार को एक बैठक की, जिसमें सरकार बनाने के लिए सदन में बहुमत के दौरान आप को समर्थन देने पर मुहर लगा दी गई। लवली का कहना था कि पार्टी हाईकमान ने इस बाबत जो पहले निर्णय लिया था, हमें उसका आदर करते हुए अपने कदम से पीछे नहीं हटना है। बैठक में हालांकि एक विधायक आसफ मोहम्मद गैरहाजिर रहे, लेकिन पार्टी ने उन्हें बैठक में लिये गये फैसले के बारे में अवगत करा दिया है।

दरअसल कांग्रेस हाईकमान आप को सर्मथन देने से सम्बंधी घोषणा को पलटते हुए पीछे की ओर कदम उठाकर कोई जोखिम उठाना नहीं चाहता है। उन्हें डर है कि इसका अगले साल होने वाले आम चुनाव में प्रतिकूल असर पड़ सकता है। जब वर्षों से जुड़े कांग्रेस के नेता पार्टी से नाता तोड़कर आप में शामिल हो रहे हैं और कई शामिल होने का मन बना रहे हैं तो उससे पार्टी को अब अपने वादे से मुकरना आत्मघाती कदम होगा।
 


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