मुजफ्फरनगर दंगा: प्रक्रियागत जटिलताओं, सियासी रंग के बीच राहत का इंतजार

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Sunday, December 29, 2013-1:36 PM

नई दिल्ली: उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर में दंगों पर जारी सियासत के बीच दंगा पीड़ितों से जुड़ी शिकायतें विभागीय एवं प्रक्रियागत जटिलताओं में उलझ कर रह गई दिखती है। हालांकि राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय स्तर पर राजनीतिक पार्टियां इसे सियासी रंग देने में लगी हुई है। उत्तरप्रदेश मानवाधिकार आयोग को मुजफ्फरनगर दंगे के सिलसिले में चार दिसंबर 2013 तक आठ शिकायतें प्राप्त हुई और सभी शिकायतें प्रक्रियाधीन हैं। सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत आयोग से प्राप्त जानकारी में बताया गया है कि आयोग में अध्यक्ष एवं कुछ सदस्यों के पद कुछ समय तक रिक्त थे जिनपर अब नियुक्ति हो गई है और इन शिकायतों पर विचार शुरू हो गया है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने मुजफ्फरनगर दंगों के बारे में सूचना मांगने पर कहा, ‘‘आप जो सूचना मांग रहे हैं, वह 346 पन्नों की है जिसे प्राप्त करने के लिए 692 रूपये का शुल्क भेजें।’’

 मुजफ्फरनगर दंगों के बारे में राष्ट्रपति कार्यालय को प्राप्त शिकायतों, ज्ञापनों और कार्यवाही की जानकारी एवं ब्यौरा देने के सवाल पर राष्ट्रपति सचिवालय ने कहा, ‘‘सचिवालय में प्रतिवेदनों का रिकार्ड विषयवार नहीं रखा जाता है। फिर भी उपलब्ध रिकार्ड के अनुसार मुजफ्फरनगर दंगों से संबंधित भारतीय जनता पार्टी का एक प्रतिवेदन 27 सितंबर 2013 को प्राप्त हुआ जिसे विशेष कार्य अधिकारी, प्रधानमंत्री कार्यालय को अग्रेषित कर दिया गया है।’’ इस बीच, उत्तरप्रदेश सरकार ने पहली बार स्वीकार किया कि दंगा पीड़ितों में 15 वर्ष से कम आयु के 34 बच्चों की मौत हुई है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की एक सदस्य ने कहा कि दंगे के सिलसिले में अपराधियों को गिरफ्तार नहीं किया गया है, जिसके कारण समुदाय के लोगों में भरोसा नहीं जाग पा रहा है । भय के आलम में वे अपने घरों को नहीं लौटना चाहते हैं और इस समय भीषण ठंड से जद्दोजहद कर रहे हैं।

 मुरादाबाद स्थित आरटीआई कार्यकर्ता सलीम बेग ने सरकार एवं विभागों से दंगों के बारे में जानकारी मांगी थी। मुजफ्फरनगर दंगों के चलते वहां और इससे लगे क्षेत्रों में 50 हजार से अधिक लोगों के बेघर होने की खबरें आई । इन्हें 38 शरणार्थी शिविरों में रखा गया । इन शिविरों में कुव्यवस्था एवं सुविधाओं के आभाव की खबरें सुर्खियों में है हालांकि दंगों पर सियासत जारी है। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने हाल ही में कहा था कि शिविरों में कुछ दलों से जुड़े षडयंत्रकारी रह रहे हैं। भाजपा के उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने आरोप लगाया कि मुजफ्फरनगर दंगा ‘सेकुलर सूरमाओं’ का सियासी संग्राम है। उनके अनुसार दंगों के बाद राहुल गांधी ‘सेकुलर टुरिज्म’ कर रहे हैं, वहीं मुलायम सिंह दंगा पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं जबकि दंगों के दबंग आज भी खुले घूम रहे हैं।

कुछ दिन पहले दंगा शिविरों का दौरा करते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि जिन लोगों ने दंगा कराया, वे नहीं चाहते कि आप (दंगा पीड़ित) अपने घर लौटें। राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए राहुल ने कहा था कि शरणार्थी शिविरों में स्थिति काफी खराब है, बच्चे मर रहे हैं और राज्य में एक युवा मुख्यमंत्री (अखिलेश यादव) हैं। वहीं, राज्य के गृह विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार गुप्ता ने कहा था कि राहत शिविरों में ठंड से किसी की मौत नहीं हुई है । ठंड से कभी कोई नहीं मरता है, अगर ठंड से किसी की मौत होती तो दुनिया के सबसे ठंडे इलाके साइबेरिया में कोई जिंदा नहीं बचता। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विवादास्पद बयान देने वाले गृह विभाग के प्रमुख सचिव का लगभग बचाव करते हुए कहा कि ‘टीवी चैनलों के जमाने में’ अधिकारियों को अपनी भाषा पर नियंत्रण रखना चाहिये। सरकार की कोशिश है कि मुजफ्फरनगर का मसला खत्म हो और विस्थापित लोग अपने घर वापस जाएं। रालोद नेता जयंत चौधरी ने कहा कि कानून एवं व्यवस्था देखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है और मुजफ्फरनगर दंगा लापरवाही का परिणाम है।


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