हाथ में झाड़ू, सिर पर टोपी, गाल पर तिरंगा

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Sunday, December 29, 2013-1:44 PM

नई दिल्ली (सुनील पाण्डेय): छोटे से कद का एक साधारण सा दिखने वाला आदमी। गर्मियों में पैंट के ऊपर आधी बाजू की ढीली-ढाली शर्ट पहनता है तो ठंड में नीले रंग का स्वेटर और गले में सामान्य सा मफलर। कभी प्लेटफॉर्म पर सो जाता है तो कभी आम लोगों के साथ सड़क पर होता है। कभी वह पुलिस का थप्पड़ खाता है तो कभी सड़क से पुलिस घसीटते हुए ले जाती है। 45 साल की इस शख्सियत को लोग कहते हैं अरविंद केजरीवाल।

शनिवार दोपहर 12 बजे यह व्यक्ति दिल्ली का मुख्यमंत्री बन गया और दूसरे दलों के नेता हाथ मलते रह गए। आम आदमी के मुखिया ने जब दिल्ली की राजगद्दी संभाली तो उसके गवाह बने सैंकड़ों वी.आई.पी. लोग, जो अबतक सचमुच आम आदमी थे। देश का शायद यह पहला शपथ ग्रहण समारोह था, जिसमें न तो कोई बड़ा चर्चित चेहरा था, न ही सांसद, केंद्रीय मंत्री एवं अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री। शपथ लेने वाला भी आम आदमी और उसे देखने और सुनने वाला भी आम आदमी।

 हाथ में झाडू़, माथे पर टोपी और गाल पर तिरंगा चिपकाए रामलीला मैदान में पहुंचे सैंकड़ों लोगों के हुजूम ने देखा केजरीवाल का रामलीला से राजलीला तक का सफर। वंदे मातरम...भारत माता की जय और इंकलाब जिंदाबाद के नारों से समूचा रामलीला मैदान गूंज उठा। इतनी भीड़ तो अढ़ाई साल पहले भी नहीं उमड़ी थी, जब अरविंद केजरीवाल एवं उनकी पूरी टीम ने जनलोकपाल को लेकर आंदोलन चलाया था। लोग गदगद थे। खुशी का ठिकाना भी नहीं था। हो भी क्यों न...क्योंकि उनकी सरकार जो बनी।

हर वर्ग के लोग इस क्षण का गवाह बनना चाहते थे। बच्चे, जवान, बूढ़े और महिलाएं अपने-अपने अंदाज में रामलीला मैदान पहुंचे। कुछ शारीरिक रूप से अक्षम लोग भी पहुंचे, जो ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे, लेकिन वह खुश थे कि उनके बीच के कोई आम आदमी ने आज दिल्ली की कमान संभाली है। रामलीला मैदान खचाखच भरा था और चारों तरफ सफेद टोपियां दिखाई दे रहीं थीं। आसपास की इमारतों की छतों से भी सैंकड़ों लोग इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने हुए थे। अन्य प्रदेशों से भी लोग समारोह में शामिल हुए।
 


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