समलैंगिकता पर सरकार के रूख का धार्मिक नेताओं ने किया विरोध

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Monday, December 30, 2013-9:35 AM

नई दिल्ली: धार्मिक नेता संप्रग सरकार के समलैंगिकता को अपराध करार देने वाले उच्चतम न्यायालय के निर्णय की समीक्षा करने के संप्रग सरकार के विरोध में आज मिलकर सामने और चेतावनी दी कि यदि भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को कमजोर करने का कोई प्रयास किया गया तो वे आंदोलन करेंगे।

एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और जैन धर्मों के धर्म गुरूओं ने कहा कि समलैंगिकता ‘‘पश्चिमी देशों की बुराई’’ है और यह भारत की धार्मिक, नैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को नष्ट कर देगी।

जमाते इस्लामी हिंद अध्यक्ष मौलाना सैयद जलालुद्दीन उमरी ने यहां एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए सरकार को चेतावनी दी कि वह ऐसा कोई विधेयक नहीं लाये जो समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर करती हो या भारतीय दंड संहिता की धारा 377 का क्षरण करता हो।

मौलाना उमरी ने कहा, ‘‘हम सभी धार्मिक नेता समलैंगिकता के खिलाफ अभियान चला रहे हैं और हम सरकार और सांसदों से सम्पर्क करेंगे ताकि उन्हें समलैंगिकता को अपराध से दायरे से बाहर करने के लिए कदम नहीं उठाने के लिए उन्हें मना सकें।’’ उन्होंने कहा,‘‘नहीं तो हम पूरे देश और संसद के सामने प्रदर्शन करेंगे।’’

प्रयाग पीठ के शंकराचार्य ओमकरानंद सरस्वती ने कहा कि समलैंगिकता एक ‘‘बीमारी’’ है और उन्होंने सुझाव दिया कि समलैंगिक व्यक्तियों को इलाज करानी चाहिए और आध्यात्मिक गुरूओं से परामर्श करना चाहिए। इसमें उमरी के अलावा अन्य कई धार्मिक नेता शामिल थे जिसमें दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सफदर एच खान भी शामिल थे।


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