‘आप सरकार बिजली की दरें तय करने में दखल नहीं दे सकती’

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Monday, December 30, 2013-10:11 AM

मुंबई: आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली में बिजली की दरों में 50 पर्सेंट कमी का वादा किया है, लेकिन दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेग्युलेटरी कमीशन के चेयरमैन पी डी सुधाकर ने एक न्यूज पेपर को बताया कि सरकार बिजली की दरें तय करने में दखल नहीं दे सकती। यह रेग्युलेटरी मामला है। उन्होंने कहा कि हम बिजली की दरें कानून के मुताबिक तय करते हैं। आप सरकार इस प्रॉसेस में दखल नहीं दे सकती।

रेग्युलेटरी ने बताया कि सरकार केवल दरें कम करने के लिए सब्सिडी दे सकती है। सुधाकर का कहना है कि एक सीमा के बाद बिजली की दरें कम करना संभव नहीं है क्योंकि दिल्ली में 70 पर्सेंट बिजली बाहर से आती है। हमारा बिजली की कॉस्ट पर कोई कंट्रोल नहीं है। रेग्युलेटर के इस बयान से लगता है कि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के लिए  बिजली की दरें कम करना आसान नहीं होगा। इस बारे में दिल्ली की पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों का कहना है कि बिजली की दरों में कमी 'लगभग नामुमकिन' है।

बिजली डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों की दलील है कि कोयले की बढ़ी हुई कीमतों की वजह से पिछले 10 साल में पावर कॉस्ट में 300 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई है। वहीं ब्याज दरें बढऩे से लोन भी महंगा हुआ है। इस दौरान लोगों के लिए बिजली सिर्फ 70 पर्सेंट महंगी हुई है। सुधाकर ने कहा कि दिल्ली की तीनों पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों का रेवेन्यू करीब 15,000 करोड़ रुपए है। इसलिए अगर सरकार टैरिफ में 50 पर्सेंट की कमी करती है, तो सरकारी खजाने पर 7,500 करोड़ रुपए का बोझ बढ़ेगा। इसके अलावा अगर आम आदमी पार्टी को लगता है कि बिजली कंपनियों के बहीखाते में गड़बड़ी है, तो वह ऑडिटर नियुक्त कर सकती है और किसी भी गड़बड़ी को दूर कर सकती है। 


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