जल माफिया के रहमोकरम पर दिल्ली के लोग

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Monday, December 30, 2013-1:53 PM

नई दिल्ली (अजीत के. सिंह): दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारियों की मिली भगत से यहां हर दिन 10 लाख रुपए का पानी घोटाला हो रहा है। यानी की दिल्ली में हर महीने 3 करोड़ और सालाना 36 करोड़ का पानी घोटाला हो रहा है। दिल्ली में रोजाना तकरीबन 40 लाख लीटर पानी की आपूर्ति अवैध तरीके से होती है।

इनमें 25 फीसदी पानी की आपूर्ति दिल्ली जल बोर्ड टैंकरों द्वारा अवैध तरीके से होती है, वहीं बाकी पानी की आपूर्ति निजी टैंकरों से की जाती है। दिल्ली जल बोर्ड के पास तकरीबन 1000 पानी के टैंकर हैं और तकरीबन इतने ही टैंकर हैं पानी माफियाओं के पास। सर्दियों में एक हजार लीटर पानी की कीमत 250-300 रुपए होती है, वहीं यह गर्मियों में बढ़ कर प्रति टैंकर 400 से 1000 रुपए तक हो जाती है।

जल बोर्ड और पुलिस की मिली भगत : पानी माफियाओं के टैंकर भी आमतौर पर जल बोर्ड के पम्पों पर ही भरे जाते हैं। हौज खास के पास रहने वाले लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, रात में या फिर सुबह 9 बजे से पहले यहां स्थित जल बोर्ड के पम्पों पर निजी पानी टैंकर पानी भरते दिख जाते हैं।

पानी का व्यवसाय करने वाले महरौली स्थित एक एजैंसी के मालिक नाम नहीं लिखने की शर्त पर बताते हैं कि पानी की आपूॢत करने वाले व्यवसायियों को पुलिस को भी हर महीने पैसे देने होते हैं और बोर्ड के अधिकारियों को भी पैसे देने होते हैं। ऐसे में उन्हें इस व्यवसाय से ज्यादा मुनाफा नहीं होता। निजी आपूर्तिकर्ता केवल जल बोर्ड के पम्पों से ही पानी नहीं भरते, कई बार ये निजी बोरवेल से भी पानी निकाला करते हैं। हालांकि सैंट्रल ग्राऊंड वाटर ऑथरिटी की अधिसूचना के अनुसार कॉमर्शियल प्रयोग के लिए जमीन से पानी निकालना अवैध है।

जान बूझ कर पैदा की जाती है कमी : खास कर गर्मी के दिनों में दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारी जानबूझ कर पानी की कमी पैदा करते हैं। नियम के अनुसार, पानी की कमी होने पर कोई भी व्यक्ति अपने एरिया में स्थित जल बोर्ड के कार्यालय को पानी की आपूर्ति करने के लिए कह सकता है, जबकि बोर्ड के अधिकारी पानी की कमी बताकर आपूर्ति से इंकार कर देते हैं। लाजपत नगर ब्लॉक ए में रहने वाले कुमार रंगराजन ने बताया कि कई बार जल बोर्ड के अधिकारी पानी की कमी बताकर निजी आपूर्ति टैंकरों से पानी लेने की सलाह देते हैं। कई अधिकारी तो ऐसे हैं जो लोगों को निजी आपूर्तिकर्ताओं के फोन नंबर भी देने से नहीं कतराते।

रंगराजन कहते हैं कि अप्रैल से अगस्त तक दिल्ली जल बोर्ड के फोन आपको हमेशा ही व्यस्त मिलेंगे, अगर कोई फोन उठाता भी है तो जवाब होता है कि पानी की कमी है। दिल्ली जल बोर्ड के वाटर टैंकरों और निजी आपूर्तिकर्ताओं द्वारा केवल पीने के लिए पानी का प्रयोग नहीं किया जाता बल्कि इनकी आपूर्ति कॉमर्शियल आपूर्ति के लिए भी की जाती है।

कालाबाजारी पर अंकुश जरूरी : अगर पानी टैंकर माफिया और दिल्ली जल बोर्ड की मिलीभगत समाप्त कर दी जाए तो दिल्ली के लोगों को पानी की समस्या से बहुत हद तक निजाद मिल सकती है। दिल्ली जल बोर्ड के पास अभी तकरीबन 1000 पानी टैंकर हैं। अगर इनकी संख्या बढ़ा कर1500 भी कर दी जाए और ये टैंकर पूरी ईमानदारी से पानी की आपूर्ति करें तो समस्या का हल हो सकता है। आम तौर पर यह समस्या आती है की कई टैंकर अपने निर्धारित स्थान पर नहीं जा कर पानी को कहीं और बेच देते हैं।

ब्लैक में पानी सम्पन्न लोग निजी प्रयोग के लिए खरीदते हैं, वहीं इनकी सप्लाई रेस्तरां से जैस कमर्शियल स्थानों पर भी होती है। अगर इन पानी टैंकरों में जी.पी.आर.एस. लगा दिया जाए तो इन टैकरों की निगरानी आसानी से की जा सकती है। हालांकि पार्टी टैंकरों के चालकों और अधिकारियों द्वारा किए जार रहे इस तरह की गड़बडिय़ों पर लगाम कसने के लिए जल बोर्ड द्वारा कुछ कदम तो उठाए गए हैं लेकिन इनका पालन नहीं किया जा रहा। नियम के अनुसार सभी वाटर टैंकरों पर जल बोर्ड द्वारा दिया गया एरिया लोगो लगा होना चाहिए, जबकि ज्यादातर टैंकरों पर ऐसा लोगो नहीं लगा हुआ है।

अगर इन टैकरों पर ऐसा लोगा लगा होगा तो इन टैंकरों द्वारा गलत स्थान पर पानी की आपूर्ति करने पर आम लोगों द्वारा भी इसकी पहचान आसानी से की जा सकेगी। लोगों के अनुसार जल बोर्ड के लाजपत नगर, वसंत विहार, वसंत कुंज और चितंरजन पार्क के लोगों का कहना है कि कई बार जल बोर्ड के टैंकरों द्वारा पानी की काफी बर्बादी की जाती है। अगर इन बर्बादी पर भी अंकुश लगाया जाए तो समस्या का निदान बहुत हद तक हो सकता है। लोगों के अनुसार कई बार जल बोर्ड के पानी टैंकरों से काफी पानी छलकता रहता है। जल बोर्ड अगर कमर्शियल आवश्यकताओं के लिए होने वाली पानी की आपूर्ति में व्याप्त भ्रष्टाचार को खत्म क र देती है तो बोर्ड की आय बढ़ सकती है।


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