‘दिखावटी गुस्सा’ दिखाने वाले राहुल वीरभद्र के खिलाफ कार्रवाई करेंगे ? जेटली

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Monday, December 30, 2013-5:07 PM

नई दिल्ली: भाजपा के वरिष्ठ नेता अरूण जेटली ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखा और राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या वह उनके विरूद्ध कार्रवाई को आगे बढ़ाने को कहेंगे या घूसखोरी के प्रति ‘‘दिखावटी गुस्सा’’ ही दिखाते रहेंगे। उन्होंने मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की।

जेटली ने इस बारे में प्रधानमंत्री को कल लिखे पत्र की जानकारी आज यहां संवाददाताओं को देते हुए दावा किया कि वीरभद्र के विरूद्ध भ्रष्टाचार के मामलों के ‘‘पक्के सुबूत’’ हैं। उन्होंने साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी तथा उपाध्यक्ष राहुल गांधी से पूछा कि ऐसे कथित पुख्ता आरोपों के बावजूद वीरभद्र मुख्यमंत्री पद पर कैसे बने हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘क्या सोनिया गांधी और राहुल गांधी उनसे निपटने पाने मे अक्षम हैं’’ ?

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इससे पहले वीरभद्र पर ‘इस्पात समूह’ और किन्हीं आनंद चौहान से धन लेने के आरोपों मेें ‘अगर-मगर’ हो सकती है लेकिन प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने जिस साई कोठी पन बिजली परियोजना और उससे जुडे मैसर्स वेंचर एनर्जी एंड टेक्नालॉजी प्रा लि मामले का उल्लेख किया है उसमें वीरभद्र पर भ्रष्टाचार का ‘‘पक्का मामला’’ बनता है।

उन्होंने कहा कि हिमााचल प्रदेश विधानसभा चुनाव लडऩे पर वीरभद्र ने 17 अक्तूबर 2012 को निर्वाचन अधिकारी को दिए संपत्ति और देन दारियों के हलफनामे में उक्त कंपनी से रिण लेने का कोई उल्लेख नहीं किया है। लेकिन मंडी संसदीय क्षेत्र से लोकसभा उप चुनाव लडऩे पर उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह ने 30 मई 2013 को दिए हलफनामे में बताया कि पन बिजली परियोजना से जुड़ी उक्त कंपनी के प्रमोटर वकमुल्ला चन्द्रशेखर से उन्होंने डेढ़ करोड़ और उनके पति वीरभद्र सिंह ने 2 . 40 करोड़ रूपयों का रिण लिया।
जेटली ने कहा, हालांकि उस समय के दस्तावेज बताते हैं कि जिस समय उक्त रिण लिए गए उस वक्त दोनों के खातों में अतिरिक्त धन था और उन्हें रिण की जरूरत नहीं थी। भाजपा नेता ने इसे ‘‘भ्रष्टाचार और हितों के टकराव’’ का मामला बताया। उन्होंने कहा कि अगर कथित रिण लिया भी गया तो उस कपंनी के प्रमोटर से क्यों लिया गया जिसे राज्य में पन बिजली परियोजना का ठेका दिया गया है।उन्होंने कहा कि इस कंपनी को सरकार को 58 . 19 लाख रूपए देने हैं जो अभी तक नहीं दिए गए हैं।    प्रधानमंत्री से उन्होंने आग्रह किया कि वह इस मामले की सीबीआई से जांच के तुरंत आदेश दें।


 


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