बोधगया एवं पटना में धमाका और भटकल की गिरफ्तारी से चर्चा में बिहार

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Tuesday, December 31, 2013-12:11 PM

पटना: देश के कई बड़े शहरों में आतंकी हमलों के जिम्मेवार प्रतिबंधित इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के विश्व धरोहर बोध गया के महाबोधि मंदिर परिसर और पटना में सिलसिलेवार बम धमाकों तथा इस प्रतिबंधित संगठन के संस्थापकों में से एक यासीन भटकल की गिरफ्तारी के साथ ही आतंकियों को पाकिस्तान से मिल रही आर्थिक मदद को लेकर बिहार वर्ष 2013 में सर्खियोंमें रहा। नेपाल की सीमा से लगे बिहार के पूर्वी चंपारण के अलावा मिथिलांचल के दरभंगा, समस्तीपुर और मधुबनी जिले में वर्ष 2013 में आतंकी संगठन आईएम से संबंध रखने वालों की गिरफ्तारी तथा उनसे बरामद दस्तावेजों से राज्य में इनकी सक्रियता के साथ ही गतिविधियों का पर्दाफाश हुआ।

आतंकियों के संबंध में दक्षता रखने वाली राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) भी नेपाल की सीमा से इन जिलों के लगे होने के कारण लगातार पैनी नजर बनाये हुयी थी। वैसे तो केन्द्र सरकार ने बिहार से लगे भारत-नेपाल की खुली सीमा पर विदेशी नागरिकों, माओवादियों की घुसपैठ तथा तस्करी रोकने के इरादे से वर्ष 2001 में पहली बार सीमा बल (एसएसबी) के जवानों को तैनात किया था। प्रारंभ में एसएसबी के जवानों को नेपाल की सीमा से चंपारण तथा रक्सौल के चेकपोस्टों (नाका) पर तैनात किया गया, लेकिन बाद में इसका पूरे सीमावर्ती इलाकों में विस्तार कर दिया गया।

देश के कई बड़े शहरों में हुयी आतंकी घटनाओं की जांच कर रही एनआईए ने इस वर्ष 21 जनवरी को मिथिलांचल के दरभंगा जिले के लहेरिया सराय थाना के चकजोहरा मुहल्ला से देर रात आईएम के आतंकी भटकल के प्रमुख सहयोगी दानिश अंसारी को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी को उसकी मुंबई में हुए विस्फोट और हैदराबाद के  चिन्नास्वामी स्टेडियम में बलास्ट समेत कई आतंकी घटनाओं में तलाश थी। आतंकी दानिश को शिकंजें में लेने के बाद एनआईए की टीम ने मिथिलांचल के ही समस्तीपुर जिले के कल्याणपुर थाना के मनियारपुर गांव में 25 जनवरी को आईएम में नम्बर दो का ओहदा रखने वाले तहसीन अख्तर उर्फ टी. मोनू की तलाश में छापेमारी की। हालांकि छापेमारी की भनक मिलते ही तहसीन बच निकला। एनआईए का मानना है कि आतंकी सरगना भटकल से दानिश को तहसीन ने ही मिलवाया था।

इसके कुछ दिन बाद सात जुलाई को बिहार में पहली बार हुए आतंकी हमले में भगवान बुद्ध की नगरी बोध गया के महाबोधि मंदिर परिसर और उसके आसपास का क्षेत्र अहले सुबह नौ धमाकों से दहल उठा। इस आतंकी हमले में दो श्रद्धालु घायल हुये। सुबह करीब साढ़े पांच बजे से शुरु हुआ यह धमाकों का सिलसिला करीब 25 मिनट तक जारी रहा। इसके बाद सुरक्षा बलों ने तीन जिंदा बमों को बरामद कर निष्क्रिय किया। बोध गया में हुए विस्फोटों को गृह मंत्रालय ने गंभीरता से लेते हुए इन्हें आतंकी हमला बताया और तत्काल एनआईए को जांच के लिए बोध गया भेजा। एनआईए की टीम इस आतंकी हमले की जांच के लिए सात जुलाई की देर रात बोध गया पहुंची और जांच-पड़ताल में लग गई। आतंकियों ने बोधगया मंदिर परिसर में धमाके ऐसे समय किये जब वहां श्रद्धालुओं की संख्या नहीं के बराबर होती है।

आतंकियों की मंशा क्या थी इस पर अभी भी एक तरह से रहस्य बना हुआ है। हालांकि राज्य के पूर्व पुलिस अधिकारियों के अनुसार आतंकियों ने धमक दिखाकर चौकसी आंकी है तथा ऐसे में आगे और बड़ी आतंकी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। इसके अगले ही माह 29 अगस्त को नेपाल से लगे बिहार के रक्सौल स्थित नहर चौक के निकट से देश में पिछले दिनों हुये कई आतंकी धमाकों के मास्टर माइंड और आईएम के सरगना यासीन भटकल और उसके सहयोगी आसादुल्लाह अख्तर उर्फ हड्डी को बिहार पुलिस ने केन्द्रीय खुफिया एजेंसी की मदद से गिरफ्तार कर लिया। आतंकी भटकल का असली नाम मो. सैयद अहमद जरार सिद्दिबप्पा है। इसके कुछ ही दिन बाद 14 सितम्बर को भटकल से आतंकियों के संबंध में पुख्ता प्रमाण इक_ा करने के लिए एनआईए ने उसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच लेकर दरभंगा पहुंची।

भटकल को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के विशेष विमान से दरभंगा हवाई अड्डा लाया गया और इसके बाद जांच एजेंसी भटकल को मब्बी थाना के जमालचक गांव लेकर गई जहां वह वर्ष 2005 में किराये के एक मकान में रहा करता था। भटकल की गिरफ्तारी के बाद से अपने संगठन आईएम में नम्बर दो का ओहदा संभाल रहे तहसीन अख्तर उर्फ टी.मोनू और वकास उर्फ जावेद उर्फ अहमद के संबंध में जानकारी के लिए इसी माह 24 सितम्बर को जांच एजेंसी ने आम लोगों से अपील जारी की थी। आतंकी तहसीन बिहार के समस्तीपुर जिले के कल्याणपुर थाना के मनियारपुर गांव का रहने वाला है जबकि वकास पाकिस्तान का रहने वाला है। इस बीच आईएम के आतंकियों ने तमाम सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए 27 अक्टूबर को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की हुंकार रैली के दिन पटना जंक्शन के पलेटफार्म संख्या दस के निकट एक शौचालय में करीब साढ़े नौ बजे धमाका किया।

हालांकि इस धमाकें में आतंकी तारिक अंसारी उर्फ एनुल घायल हो गया जबकि अपने साथी को बचाने के क्रम में इम्तियाज अंसारी को पुलिस ने धर दबोचा। इस हमले में छह लोगों की मौत हो गयी और तकरीबन 100 लोग घायल हुए। गांधी मैदान और उसके आसपास से मिले तीन बमों को पुलिसकर्मियों ने बम निरोधक दस्ता के सहयोग से निष्क्रिय कर दिया। गांधी मैदान में सुरक्षा के मद्देनजर एक सप्ताह तक आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। पटना में विस्फोट करने की योजना तहसीन ने ही बनाई थी और उसी के दिशा-निर्देश पर झारखंड के रांची से आईएम के कई सदस्यों ने मिलकर इस घटना को अंजाम दिया था। इस विस्फोट को अंजाम देने के लिए आईएम ने अलग-अलग टीम बनाई थी।

विस्फोट के बाद पुलिस और जांच एजेंसी ने झारखंड की राजधानी रांची के एरम लॉज, धुर्वा, ओरमाझी समेत कई अन्य ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर पटना विस्फोट के संबंध में पुख्ता जानकारियां इक्टठा की। छापेमारी के दौरान इन स्थानों से आईएम से जुड़े जहां महत्वपूर्ण सुराग मिलें वहीं विस्फोटों में इस्तेमाल होने वाले कई सामग्रियों को जब्त किया गया। इसके कुछ दिन बाद एनआईए की मोस्टवांटेड की सूची में शामिल आईएम के तहसीन अख्तर उर्फ टी मोनू और हैदर अली का पाकिस्तान से तार जुड़े होने के संबंध में पटना पुलिस ने गांधी मैदान थाना में 22 नवम्बर को एक मामला दर्ज किया।
 


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