‘मुख्यमंत्री रहते कभी दलितों के घर नहीं गई मायावती’

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Tuesday, December 31, 2013-12:59 PM

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा है कि बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 15 जनवरी को सावधान रैली घोषित कर प्रदेश की जनता को सावधान होने के लिए सचेत कर दिया है। वे फिर पहले की तरह अपने सांसदों, विधायकों और नेताओं से जन्मदिन की चंदा वसूली में लग गई हैं। जिसमें कईयों की जानें जा चुकी हैं। वे मुजफ्फरनगर के मुस्लिमों के लिए दिखावटी हमदर्दी दिखाकर भाजपा की बी टीम का फर्ज निभाने जा रही है। लोकसभा चुनाव नजदीक हैं और जनता केा ऐसे तत्वों से सावधान रहना होगा जो मानवीय त्रासदी का भी सियासी फायदा उठाने की साजिशों से बाज नहीं आते है।

भले ही बसपा नेता यह दावा करें कि वह दूसरी पार्टियों की तरह बड़े-बड़े धन्ना सेठों और पूंजीपतियों से चन्दा नहीं लेती पर हकीकत में बसपा मुखिया उन जैसा बनने से कोई मौका नहीं छोड़ती हैं। उनके जन्मदिन 15 जनवरी पर जबरन चंदा वसूली की परम्परा चलती आई है। औरैया के मनोज गुप्ता इंजीनियर की बसपा विधायक ने सन् 2008 में पीट-पीट कर निदर्यता से हत्या कर दी थी। इंजीनियर ने मुंह मांगी रकम देने से मना कर दिया था। अब मायावती के जन्मदिन पर सॉसदों और लोकसभा प्रभारियों और विधायकों तथा विधानसभा प्रभारियों से रूपयों की वसूली का फरमान जारी हो गया है। वैसे यह दिखावे के लिए बयान है। दरअसल जन्मदिन के बहाने यह काली कमाई को सफेद बनाने का गोरखधंधा है। इस तरह से वसूली रकम से पूर्व मुख्यमंत्री की तिजोरी भरती जाती है और खुद किसी धन्नासेठ या बड़े पूंजीपति से उनकी हैसियत कम नहीं आंकी जा सकती है।

मायावती के मुख्यमंत्रित्वकाल में भ्रष्टाचार का परनाला सचिवालय के मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर तहसील स्तर तक बहता था। हद तो तब हो गई जब पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी मूर्तियां लगवाने में भी मोटा कमीशन वसूल लिया। जनता की गाढ़ी कमाई पत्थरों पर लुटा दी गई। दलित महिला होने की दुहाई देने वाली बसपा मुखिया ने पांच सालों तक कभी किसी पीड़ित दलित से मुलाकात नहीं की। उनके दुखदर्द में शामिल नहीं हुई। दलित भले दीनदशा में जिन्दगी जिए उनकी नेता को हीरे-जवाहरातों का बेहद शौक है। दलितों को झोपड़ी नसीब नहीं ए बसपा अध्यक्षा को बड़े-बड़े बंगलों में वैभवशाली जीवन जीने की आदी है। दलितों के नेतृत्व के नाम पर बसपा में पूंजीघरानों को ही पद और टिकट दिए जाते रहे हैं।

मान्यवर के साथ जो कैडर बना था उसके प्रमुख सहयोगियों को एक-एक कर मायावती ने किनारे कर दिया और उन्हें पार्टी से ही निकाल दिया। पुराने कैडर की जगह अवसरवादी और धनबली-बाहुबली लोगों की भर्ती की गई। रूपयों पर पदों और टिकटों की नीलामी भी खूब हुई। राजनीति सेवा के लिए है, बसपा अध्यक्षा ने इसको मेवा खाने का माध्यम बना लिया है। जनतांत्रिक मूल्यों से उनका कोई सरोकार नहीं रह गया हैं। बसपा सिर्फ  उनकी तानाशाही से चलती है। जनता उनके राजनीतिक आचरण से भली भांति वाकिफ है और लोग उनकी आय से अधिक संपत्ति बटोरने की हरकतों से भी परिचित है। काठ की हांडी बार-बार नही चढ़तीं है। अब प्रदेश की जनता बसपा के कुकृत्यों से सावधान है।


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