यूपी: जख्म भरने की कोशिशों के साथ करें नववर्ष का स्वागत

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Wednesday, January 01, 2014-5:34 AM

मुजफ्फरनगर: वर्ष 2013 जनपद के निवासियों के लिए एक काला अध्याय बन गया है जिसमें हुआ दंगा एक त्रासदी के रूप में झेलना पड़ा। यह कलंक सालों-साल तक नहीं मिट पाएगा जिसे अभी भी कुछ लोग हवा दे रहे हैं। अक्सर कहा जाता है कि राजनीति निष्ठुर होती है, जिसका एक मात्र लक्ष्य सत्ता हथियाना है। इसके लिए नेता हर मर्यादा, विवेक, धर्म की लक्ष्मण रेखाओं का निर्लज्जता से उल्लंघन कर सकते हैं। कवाल हत्याकांड के बाद राजनीतिज्ञों के इस गिरगिटिए रूप को प्रत्यक्ष देखा गया। कड़कड़ाती सर्दी में झोंपडिय़ों में सिसक रहे बच्चों की मौत पर भी नेताओं ने राजनीति शुरू कर दी और आफिसरों की रिपोर्टों के जरिए अपनी जिम्मेदारी से मुक्ति पाने की कोशिश की गई।

चारा घोटाले के हीरो लालू प्रसाद आकर कहते हैं- पटवारी का नाम बताओं, उसे पीटूंगा। सुभाषिनी अली बार-बार शिविरों पर मंडरा कर माक्र्सवादी पार्टी की जमीन तलाश रही हैं। कुछ लोग विदेशों में जनपद में एक वर्ग विशेष पर अत्याचार के नाम पर राहत राशि एकत्र कर रहे हैं और धर्म के नाम पर राजनीति चमकाने का कार्य कर रहे हैं। इससे अधिक दुखदायी स्थिति क्या होगी कि जो मीडिया सत्यान्वेषण के लिए जाना जाता है, वह भी खेमों में बंट गया है। कवाल दंगे के जख्म भरने की कोशिशों के साथ हमें नववर्ष का स्वागत करना चाहिए, इसलिए आशा है कि परमात्मा करे कि साल 2014 में नफरत की खाई खत्म हो सके।


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