सुरक्षा न लेकर क्या समझदारी दिखा रहे हैं केजरीवाल

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Wednesday, January 01, 2014-8:22 AM

नई दिल्ली: नए मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को सुरक्षा लेनी चाहिए कि नहीं, इस पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। वास्तव में वी.आई.पी. सुरक्षा को पूरे विश्व में तरजीह दी जाती है, वहीं भारत में इसे स्टेटस सिम्बल के तौर पर माना जाता है। केजरीवाल बार-बार कह चुके हैं कि उन्हें तथा उनके मंत्रियों को सरकारी बंगले तथा लाल बत्ती वाली गाडिय़ां नहीं चाहिए।

केजरीवाल तथा उनके सहयोगियों को पूर्व में धमकियां मिलती रही हैं। यही नहीं ‘आप’  सदस्य प्रशांत भूषण पर हमला भी हो चुका है। परन्तु एक ऐसा देश जहां पर प्रधानमंत्रियों तथा मुख्यमंत्रियों की हत्याएं हो चुकी हों तथा संसद पर आतंकी संगठनों का हमला हो चुका हो, केजरीवाल को सुरक्षा के मामले को लेकर नरमी बरतना कई सवालों को जन्म देता है।

क्यों नहीं चाहते सुरक्षा-

1. केजरीवाल आम आदमी की छवि को दर्शा रहे हैं और वह वी.आई.पी. कल्चर को बंद करना चाहते हैं।
2. केजरीवाल का मानना है कि वी.आई.पी. सुरक्षा पर आने वाला खर्च सुरक्षा न लेकर कुछ कम किया जा सकता है लेकिन वास्तव में वह खर्च कम करने की बजाय बढ़ा रहे हैं।
3. लाल बत्ती वाली गाड़ी में घूम कर वह लोगों से दूर हो जाएंगे क्योंकि उनकी पार्टी आम लोगों की ही पार्टी है। वह ऐसा मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं जो सीधे आम लोगों से जुड़ा रहे।
4. केजरीवाल का मानना है कि यदि नेता लोगों के हितों वाली पॉलिसियों पर अमल करने लगें तो उन्हें खतरे का कोई डर नहीं रह जाएगा।

क्यों जरूरी है सुरक्षा-

1. सुरक्षा न लेना समझदारी नहीं क्योंकि इस तरह पुलिस को केजरीवाल की सुरक्षा में सामान्य से कई गुणा अधिक सुरक्षाकर्मी लगाने पड़ रहे हैं।
2. केजरीवाल के रामलीला ग्राऊंड में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान 1700 पुलिस कर्मी लगाने पड़े, जबकि यदि उपराज्यपाल के निवास पर यह समारोह होता तो शायद 100 पुलिस कर्मी ही काफी होते।
3. वैसे भी मुख्यमंत्री को एक समय सीमा की हद में रह कर हर जगह पहुंचना होता है। मान लो अगर केजरीवाल की वैगन आर बिना पायलट के कहीं पर ट्रैफिक जाम में फंस जाती है तो समय पर न पहुंचने के कारण कई महत्वपूर्ण मुद्दे छूट सकते हैं।
4. मुख्यमंत्री की कुर्सी के साथ कुछ जोखिम भी बंधे हुए हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी भी संभावित खतरे के चलते जैड प्लस सुरक्षा ले रहे हैं ऐसे में केजरीवाल को भी खतरे की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।
5. पूर्व सी.एम. शीला दीक्षित की सुरक्षा में 2 इंस्पैक्टर, 4 ए.एस.आई., 8 हवलदार और 16 सिपाही यानी कुल 30 सुरक्षाकर्मी थे।  केजरीवाल को इतने न सही तो इससे आधे या उससे कुछ कम सुरक्षाकर्मी जरूर ले लेने चाहिएं।

संक्षेप में यदि कहा जाए तो सुरक्षा के मुद्दे पर केजरीवाल कम खर्च वाला निर्णय लेकर सराहनीय कार्य कर रहे हैं लेकिन इससे वह आम लोगों की सुरक्षा की अनदेखी भी कर रहे हैं। उनके आसपास चलने वाली भीड़ को काबू करने के चक्कर में ज्यादा संख्या में पुलिस कर्मी लगाने पड़ते हैं, जिससे पुलिस को बाकी लोगों की सुरक्षा का ध्यान रख पाना मुश्किल होता है। दिल्ली की जनता ने केजरीवाल को इसलिए वोट दिया क्योंकि वह वी.आई.पी. कल्चर बंद करना चाहते थे लेकिन मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी सुरक्षा भी तो जरूरी है। केजरीवाल को अगर ज्यादा नहीं तो 6-7 सुरक्षा कर्मी अपनी सुरक्षा में रखने चाहिएं क्योंकि अब वह आम आदमी नहीं रहे, दिल्ली के मुख्यमंत्री बन
चुके हैं।

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