आंध्रप्रदेश में संसदीय कार्य मंत्रालय शैलजानाथ को आवंटित

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Wednesday, January 01, 2014-10:29 AM

हैदराबाद: आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री एन किरण कुमार रेड्डी ने आज एक आश्चर्यजनक घटनाक्रम में नागरिक आपूर्ति मंत्री डी श्रीधर बाबू से संसदीय कार्य मंत्रालय लेकर इसे स्कूल शिक्षा मंत्री एस शैलजानाथ को आवंटित कर दिया। श्रीधर बाबू की हाल में आहूत विधानसभा सत्र के दौरान आंध्रप्रदेश तेलंगाना विधेयक 2013 सदन में पेश करने में महत्वपूर्ण भूमिका थी। सीमान्ध्र क्षेत्र के विधायकों के जोरदार विरोध के कारण विधेयक पर हालांकि बहस नहीं हो सकी थी। शैलजानाथ जिन्हें संसदीय कार्य विभाग आवंटित किया है।

 

आंध्रप्रदेश को संयुक्त रखने के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। रेड्डी ने श्रीधर बाबू को वाणिज्यिक विकास विभाग का भी कार्यभार सौंपा है। श्रीधर बाबू ने कहा कि मैं मीडिया में आई इस तरह की खबरों से आश्चर्यचकित हूं। मुझे अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक संदेश नहीं मिला है। इस बीच तेलंगाना के कार्यकर्ताओं और श्रीधर बाबू के समर्थकों ने मुख्यमंत्री के इस कदम के विरोध में आज करीमनगर बंद का आयोजन किया है।

 

इसके कारण वहां दुकानें, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और शैक्षिक संस्थान बंद रहे जबकि आंध्रप्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसें सड़कों पर दिखाई नहीं दीं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के खिलाफ नारे लगाए और उनका पुतला फूंका। उन्होंने टायर भी जलाए। पार्टी लाइन से हटकर तेलंगाना क्षेत्र के सभी दलों के नेताओं ने इस घटना की निंदा की और कहा कि तेलंगाना विधेयक को पारित होने से रोकने के लिए यह किया गया है।

 

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने आंध्रप्रदेश पुनर्गठन विधेयक 2013 गत 12 दिसंबर को राज्य विधानसभा को उसके विचार जानने के लिए भेजा है। इसे 16 दिसंबर को विधानसभा में पेश किया गया था। रेड्डी ने नव गठित तेलुगु भाषा विकास विभाग पर्यटन मंत्री वत्ती वसंत कुमार को आवंटित किया है। इस बीच पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी श्रीनिवास ने श्रीधर बाबू के विभाग को बदलने को अलोकतांत्रिक करार देते हुए केन्द्रीय नेताओं से अपील की कि पार्टी को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

 

तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष के चन्द्रशेखर राव ने कहा कि मुख्यमंत्री के इस  कदम का तेलंगाना विधेयक और संविधान के अनुरूप तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। राज्य विधानमंडल का राज्य के विभाजन से कोई लेना-देना नहीं है।


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