अब क्लास रूम से तय होगा हिन्दुस्तान का भविष्य: मनीष

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Wednesday, January 01, 2014-5:33 PM

नई दिल्ली : अब हिन्दुस्तान का भविष्य पीएम या सीएम ऑफिस से नहीं बल्कि क्लास रूम से तय होगा। दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को द्वारका सैक्टर-11 स्थित प्रतिभा बाल विकास विद्यालय के वार्षिक दिवस समारोह को सम्बोधित करते हुए ये बातें कहीं।
 
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि जब पंडित जवाहर लाल नेहरू प्रधानमंत्री बनकर तुर्की गए तो उन्होंने वहां के राष्ट्रपति कमाल पाशा से भारत में किए जा रहे विकास कार्यक्रमों के बारे में जिक्र किया। नेहरू जी ने कहा कि हम पुल, सड़कें  आदि बनवा रहे हैं।

इस पर कमाल पाशा ने कहा, नेहरू जी, यह अच्छी बात है, पर हम अपने यहां कौम बना रहे हैं। अगर कौम बन गई तो इस तरह के विकास भी हो जाएंगे। पर, अगर कौम यानी जिम्मेदार नागरिक तैयार नहीं हुए तो हमें ऐसे समाज का सामना करना पड़ेगा जिसमें भ्रष्टाचार, अराजकता और संवेदनहीनता का बोलबाला होगा।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि एक इंसान अपनी जिंदगी के तकरीबन 20 साल हमारी शिक्षा व्यवस्था को सौंपता है ताकि यह व्यवस्था उसे समाज के लिए बेहतर नागरिक बना सके। पर, हम उस इंसान को तकनीकि तौर पर तो कुशल बना देते हैं लेकिन उसे समझदार नहीं बना पाते।

आज एक इंजीनियर पहले से बेहतर कम्प्यूटर, लैपटॉप के मॉडल तो बना सकता है लेकिन उसे यह नहीं पता होता कि पति-पत्नी के बीच के तनाव को कैसे खत्म किया जाए या फिर अपने पड़ोसी या ऑफिस के सहयोगी के साथ कैसे बेहतर व्यवहार किया जाए।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि उन्हें ऐसी खबरें सुनकर बहुत दुख और हैरानी होती है कि आईआईटी-आईआईएम में पढ़ाई करके मल्टीनैशनल कंपनी में काम करने वाला कोई शख्स वैश्विक मंदी के दौरान नौकरी छूटने पर आत्महत्या जैसा कदम कैसे उठा लेता है।

ऐसी घटनाओं का मतलब है कि हम उसे नौकरी करने लायक तो बना देते हैं लेकिन उसमें विश्वास नहीं पैदा कर पाते। अगर विश्वास पैदा कर पाते तो उसे इतना अहसास जरूर होता कि ऐसे हालात के बावजूद वह अपनी काबिलियत के भरोसे समाज में अपना अस्तित्व बरकरार रख सकता है।

सिसोदिया ने बताया कि वह एक किसान परिवार से आते हैं और उनके पिता शिक्षक रहे हैं। बेहद भावुक अंदाज में उन्होंने कहा, मैंने आजतक कभी नहीं सुना किसी शिक्षक ने लाल बत्ती की मांग की हो या बहुत ज्यादा पावर मांगी हो। शिक्षक ने तो हमेशा सम्मान मांगा है।

हमारी, आपकी और समाज की जिम्मेदारी है कि हम शिक्षकों का सम्मान बढ़ाएं। सिसोदिया ने कहा कि डॉक्टर आपके शरीर के साथ मतलब रखता है। मनोवैज्ञानिक आपके दिमाग के साथ मतलब रखता है। वहीं, शिक्षक आपके पूरे व्यक्तित्व का निर्माता होता है। शिक्षकों को सम्मान देकर हम उन्हें इसका अहसास करा सकते हैं।

 


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