केजरीवाल: लीक हटकर एक मुख्यमंत्री

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Thursday, January 02, 2014-4:07 AM

नई दिल्लीः यह निश्चित रूप से असामान्य उच्चस्तरीय सरकारी बैठक थी। दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के कौशांबी में एक मध्यमवर्गीय अपार्टमेंट के अतिथिगृह में अरविंद केजरीवाल अपने सोफे पर बैठे हुए थे। एक शॉल से शरीर ढंका हुआ था और सिर पर ऊन की टोपी थी जिससे उनका कान तक ढंका था।

दिल्ली के नौकरशाहों के लिए लीक से हटकर एक मुख्यमंत्री के साथ उनका यह पहला अनुभव था। यह मुख्यमंत्री शासन के तौरतरीकों में एक नई परंपरा की नींव रखने पर अमादा है। यह मौका नई सरकार की पहली उच्चस्तरीय बैठक का था जिसमें दिल्ली के लोगों को मुफ्त पानी मुहैया कराने के बारे में फैसला लिया जाना था। मुफ्त पानी मुहैया कराना आम आदमी पार्टी (आप) के बड़े चुनावी वादों में से एक है।

नई सरकार के गठन होने के तीसरे दिन सोमवार को यह पहला बड़ा फैसला था। मुख्यमंत्री को कफ ने जकड़ रखा था और वे बुखार में तप रहे थे, फिर भी उन्होंने अपना तय कार्यक्रम जारी रखने और लोगों से किए गए वादे को पूरा करने का फैसला लिया। एक छोटे से बैठक सह भोजन कक्ष में दिल्ली जल बोर्ड के 18 सदस्य मौजूद थे। जल बोर्ड के सीईओ विजय कुमार और वित्त सचिव एम. एम. कुट्टी भी उस बैठक में शामिल हुए थे।

मुख्यमंत्री के एक करीबी पार्टी कार्यकर्ता ने आईएएनएस को बताया कि केजरीवाल अपने सोफे पर बैठे थे जबकि कुमार और कुट्टी गिरनार टावर के मध्यम वर्गीय आवास के ड्राइंग रूप में उनके सामने थे। दोनों नौकरशाहों ने मुख्यमंत्री और अन्य पार्टी सदस्यों को आप के 667 लीटर पानी मुफ्त मुहैया कराने की जटिलताओं के बारे में बताया। जल बोर्ड के अन्य अधिकारियों ने भी अपने विचार रखे। केजरीवाल चुपचाप उनकी बातें सुनते रहे। दो शयनकक्षों वाला यह अपार्टमेंट गिरनार टावर के चौथे माले पर स्थित है जहां केजरीवाल अपने माता-पिता, अपने दो बच्चों और पत्नी के साथ रह रहे हैं।


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