यौन उत्पीडऩ मामला: जस्टिस गांगुली बोले, कुछ तय नहीं किया

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Thursday, January 02, 2014-10:29 AM

नई दिल्ली: सरकार पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एके गांगुली के खिलाफ यौन उत्पीडऩ़ के आरोप की जांच की राष्ट्रपति की सिफारिश उच्चतम न्यायालय को भेजने के बारे में आज जस्टिस (सेवानिवृत्त) ए के गांगुली से यह पूछे जाने पर कि क्या वह पश्चिम बंगाल के मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देंगे, उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कुछ तय नहीं किया है।’’ वहीं गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कल कहा था कि उनका मंत्रालय इस बारे में अपना नोट केन्द्रीय मंत्रिमंडल की गुरुवार को होने वाली बैठक में रखेगा। मंत्रिमंडल के सामने एटार्नी जनरल जीई वाहनवती की राय भी रखी जाएगी जिन्होंने न्यायमूर्ति गांगुली के खिलाफ जांच शुरू किए जाने का पक्ष लिया है।

 

केन्द्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने की स्थिति में इस सिफारिश को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के पास भेजा जाएगा। इसके बाद राष्ट्रपति औपचारिक तौर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश से न्यायमूर्ति गांगुली के खिलाफ जांच की सिफारिश करेंगे। उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति गांगुली पर दिल्ली के एक होटल में विधि की एक छात्रा के साथ बदसलूकी करने का आरोप है।

 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति को पत्र लिख कर न्यायमूर्ति गांगुली को राज्य मानवाधिकार आयोग के प्रमुख के पद से हटाने की मांग की थी। न्यायमूर्ति गांगुली ने आरोप का खंडन करते हुए इस्तीफा देने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है। राष्ट्रीय या राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को राष्ट्रपति दुर्व्यवहार के मामलों में उच्चतम न्यायालय की जांच में दोषी साबित होने के बाद ही हटा सकते हैं।


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