सरकार ने चतुराई से घटाए बिजली के दाम

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Thursday, January 02, 2014-9:49 AM

नई दिल्ली (निहाल सिंह): दिल्ली में 400 यूनिट तक बिजली के दाम घटाने पर वाह वाह बटोर रहे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इस निर्णय पर सवाल उठने लगे है। अरविंद केजरीवाल के इस कदम से दिल्ली की जनता पर ही बोझ बढ़ गया है। जानकारों का मानना है कि दिल्ली में सब्सिडी के माध्यम से घटाई गयी बिजली की दरो से सरकारी खजाने 61 हजार करोड़ रुपये का भार पड़ेगा।  यह भार जनता के चुकाए गए करो से इक्कठे हुए धन से पूरा किया जाएगा।

सब्सिडी से नहीं, व्यवस्था ठीक कर दर घटानी  थी: 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बिजली के दाम तो घटा दिए हैं, लेकिन शर्ते लगाकर जनता को इसके पीछे की बातें नहीं बताई हैं। चुनाव से पूर्व आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने अपने घोषणा पत्र में इस बात का जिक्र नही किया था कि वह सब्सिडी के माध्यम से बिजली सस्ती करेंगे। बल्कि केजरीवाल ने कहा कि था कि दिल्ली की बिजली कंपनियों ने व्यवस्था गड़बड़ कर रखी है , जिसे ठीक करके पूरी दिल्ली में बिजली के दाम घटाए जाएंगे।

खास आदमी के लिए बिजली सस्ती :

दिल्ली में बिजली के दाम घटाकर दरअसल आम आदमी पार्टी लोकसभा चुनाव के लिए अपने वौंट बैंक को फायदा पहुंचाकर इसका लाभ लोकसभा चुनावों में लेना चाहती है। इसलिए आम आदमी पार्टी अपने हर वादे का फायदा केवल निम्न क्षेणी के लोगों को पहुंचा रही है। चाहे पानी की बात हो चाहे बिजली की हर निर्णय से केवल दिल्ली के बस कुछ ही लोगों को फायदा हो रहा है। दिल्ली सरकार के इस फैसले से उन लोगों को कोई फायदा नहीं होगा जिनकी हर महिने चार सौ यूनिट से ज्यादा की खपत है।
 
परियोजना में खर्च हो सरकारी खजाना :

सरकारी खजाने से सब्सिडी देकर बिजली सस्ती करने वाले अरविंद केजरीवाल पर अब विपक्ष ने कड़ा हमला बोला है। भारतीय जनता पार्टी के विपक्ष के नेता हर्षवर्धन ने कहा कि केजरीवाल दिल्ली की जनता के साथ धोखा कर रहे हैं। दिल्ली में करो के माध्यम से इकटठा हुआ पैसा परियोजनाओं पर खर्च करने के लिए होता है।


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