साझा शोध में देश को राह दिखाएगा जेएनयू.

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Thursday, January 02, 2014-10:52 AM

नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, दिल्ली, आंध्र प्रदेश सहित देश की 12 यूनीवर्सिटीयों  के साथ मिलकर जेएनयू रिसर्च के क्षेत्र में देश को नई राह दिखाएगा। दरअसल, यू.जी.सी. के सुझाव पर जेएनयू ने इंटर डिसिप्लीनरी रिसर्च के क्षेत्र में कदम बढ़ाया है। हिमालय के ग्लेसियर पिघलने और सोसायटी पर उसके प्रभाव पर रिसर्च के लिए भारत सरकार की ओर से जे.एन.यू. को 18 करोड़ रुपए की मंजूरी मिल गई है। इस रिसर्च में जम्मू, कश्मीर और सिक्किम यूनीवर्सिटी भी साथ में काम करेगी।

जे.एन.यू. के इंटरनैशनल लीगल स्टडीज में प्रोफेसर और रिसर्च का ड्राफ्ट तैयार करने वाले भरत एच देसाई कहते हैं, हाल ही में पी.एम. ने भी इंटर डिसिप्लीनरी रिसर्च को बढ़ावा देने की सलाह दी है। सोसायटी के बदलते घटनाक्रम को समझने के लिए भी अलग-अलग डिपार्टमैंट को साथ काम करना होगा और इसी कड़ी में जेएनयू ने यह कदम उठाया है।

हैदराबाद, मद्रास, गोवा और पुणे के साथ मिलकर जेएनयू जिओ स्पैशियल इंफॉर्मेशन सिस्टम को प्रभावी इस्तेमाल करने की संभावना तलाशेगा। ताकि डिजास्टर मैनेजमैंट, नैचुरल रिसर्च मैनेजमैंट और अर्बन प्लानिंग में मदद मिल सके। 12 दिसंबर को इसके ड्राफ्ट पर सभी नौ यूनिवर्सिटी के वीसी ने हस्ताक्षर कर दिया है। अब इसे प्लानिंग कमिशन, डी.एस.टी. और डिपार्टमैंट ऑफ स्पेस से फंड मिलने की उम्मीद है।

तीसरा रिसर्च उत्तरी हिस्सों में लघु रिसर्च के मौके बनाने और पर्यावरण के मुद्दे पर है। इसमें उन इलाकों में बदलते मौसम का अध्ययन होगा। इसके लिए भी जे.एन.यू., कश्मीर, दून और शारदा ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। जे.एन.यू. के वी.सी. एसके सोपोरी ने कहा कि  हम आगे भी ऐसे रिसर्च को प्रोत्साहित करेंगे। बी.एच. देसाई कहते हैं कि बहुत बात हो गई इंटर डिसिप्लीनरी रिसर्च की। अब वक्त है उस पर काम करने का और यूनीवर्सिटी को आगे आने का।


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