दिल्ली गैंगरेप: दोषियों का आरोप, गृह मंत्रालय के इशारे पर तैयार हुआ मामला

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Friday, January 03, 2014-4:41 AM

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में 16 दिसम्बर के सामूहिक बलात्कार मामले में मौत की सजा पाए चार में से दो दोषियों ने कल दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि उनके खिलाफ मामले की ‘‘जांच नहीं की गई बल्कि उसे गृह मंत्रालय और राजनीतिक आकाओं के इशारे पर तैयार किया गया।’’ मुकेश और पवन के वकीलों ने न्यायमूर्ति रीवा क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी की एक पीठ के समक्ष दावा किया कि उनके मुवक्किलों को स्वयं को फंसाने वाला रूख अपनाने के लिए प्रताडि़त किया गया।

 

अधिवक्ता एम एल शर्मा ने दोषियों की दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ उनकी अपील पर सुनवाई करने वाली पीठ के समक्ष कहा, ‘‘पूरा मामला राजनीतिक आकाओं को खुश करने और गढ़ा हुआ है। काफी विसंगतियां हैं, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सबूतों को उनके खिलाफ गढ़ा गया।’’ अधिवक्ता ने कहा, ‘‘सरकार ने 23 दिसम्बर को एक बयान जारी किया था जिसमें उसने बलात्कारियों को सजा दिलाने की प्रतिबद्धता जताई थी जबकि उस समय तक किसी भी नमूने को यह पता लगाने के लिए सीएफएसएल नहीं भेजा गया था कि आरोप ही दोषी हैं।’’

 

अधिवक्ता ने कहा, ‘‘यह दिखाता है कि मामले की जांच नहीं की गई। इसे गृह मंत्रालय और राजनीतिक आकाओं के इशारे पर तैयार किया गया।’’ अधिवक्ता ने यह सवाल भी उठाया कि पुलिस को बस की सीट पर खून कैसे मिला जबकि पुलिस का ही कहना था कि पीड़िता का बलात्कार बस के पिछले हिस्से में उसके फर्श पर किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि लड़की को चोट बस से गिरने से लगी हो सकती है। दोषियों के अधिवक्ता ने अपनी बहस पूरी कर ली है और वह 15 जनवरी तक सार संक्षेप दायर करेंगे।

 

विशेष लोक अभियोजक दयान कृष्णन कल बहस का जवाब देंगे। गत वर्ष त्वरित सुनवाई अदालत ने 23 वर्षीय पैरामेडिक छात्रा से 16 दिसम्बर 2012 की रात में चलती बस में सामूहिक बलात्कार मामले में मुकेश और पवन के अलावा अक्षय और विनय को भी मौत की सजा सुनाई थी।


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