मैडीकल कॉलेज नियुक्त करे लैक्चरार

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Friday, January 03, 2014-11:46 AM

नई दिल्ली (मनीषा खत्री): दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले एक मैडीकल कालेज में चयन होने के बाद भी एक डॉक्टर की लैक्चरार के तौर पर नियुक्ति न करना  कालेज को भारी पड़ गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस कालेज को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता डॉक्टर को 4 सप्ताह में नियुक्ति पत्र दें।

साथ ही कालेज द्वारा इस पद के लिए फिर से शुरू की गई चयन प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति वी.जे. मेहता ने कालेज पर बीस हजार का जुर्माना लगाते हुए कहा है कि वह जुर्माने की राशि 4 सप्ताह के अंदर याचिकाकर्ता को दें। खंडपीठ ने कहा कि कालेज यह बताने में नाकाम रहा है कि जब एक बार लैक्चरार पद के लिए उम्मीदवार चयनित हो गए थे तो उनको रखने की बजाय, फिर से चयन प्रक्रिया क्यों शुरू की गई। ऐसे में फिर से शुरू की गई चयन प्रक्रिया को रद्द किया जाता है।

याचिकाकर्ता डाक्टर अतुल भारद्वाज का कहना था कि दिल्ली सरकार के तहत आने वाले चौधरी ब्रहम प्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान के बी.ए.एम.एस. कोर्स में शैल्य तंत्र विषय पढ़ाने के लिए लैक्चरार की नियुक्ति के लिए 9 सितम्बर 2000 और 19 फरवरी 2010 में विज्ञापन जारी किए गए थे। जिसके बाद लिखित परीक्षा हुई और इंटरव्यू लिए गए। 11 फरवरी 2011 को योग्य उम्मीदवार की सूची तैयार की गई परंतु उनको नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए गए।

अब कालेज ने फिर से इस पद के लिए विज्ञापन दे दिया और उनको अब तक नहीं बुलाया गया। ऐसे में कालेज द्वारा शुरू की गई नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द कर दिया जाए और उसको नियुक्ति पत्र देने का आदेश दिया जाए। दिल्ली सरकार व इस कालेज का कहना था कि जब 11 फरवरी 2011 को उन्होंने उम्मीदवार चयनित किए थे। उनके कालेज में सैंट्रल काऊंसिल ऑफ इंडियन मैडीसन के अधिकारियों को जांच के लिए आना था परंतु उसमें देरी हो गई।

 

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