‘आप’ के एम.एस.धीर बने विधानसभा अध्यक्ष

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Friday, January 03, 2014-9:55 PM

नई दिल्ली (ताहिर सिद्दीकी): आम आदमी पार्टी (आप) के उम्मीदवार एम.एस.धीर को कांग्रेस के समर्थन से दिल्ली विधानसभा का अध्यक्ष चुन लिया गया। आप के उम्मीदवार को कांग्रेस के विधायकों के अलावा जद (यू) के एक विधायक तथा एक निर्दलीय विधायक का भी साथ मिला। यह पहला अवसर है जब दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव सर्वसम्मति से होने के बजाय वोटिंग का सहारा लिया।

37 विधायकों ने धीर का समर्थन किया, जबकि भाजपा के उम्मीदवार प्रो.जगदीश मुखी को अपनी पार्टी समेत अकाली दल (बादल) के 32 विधायकों का समर्थन मिला। शुक्रवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही कार्यवाहक अध्यक्ष चौ. मतीन अहमद को सत्तापक्ष की ओर से धीर को अध्यक्ष बनाए जाने के पांच प्रस्ताव मिले।

वहीं, विपक्षी भाजपा की ओर से प्रो.जगदीश मुखी को अध्यक्ष बनाए जाने के चार प्रस्ताव आए। कार्यवाहक अध्यक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष के लिए वोटिंग कराने के बाद आप के विधायक एम.एस.धीर को निर्वाचित घोषित किया।

हालांकि कार्यवाहक विधानसभा अध्यक्ष ने भाजपा विधायकों की आपत्ति के बाद दोबारा विधायकों को खड़ा कराके वोटिंग कराई। धीर को कांग्रेस विधायकों के अलावा जद (यू) के शोएब इकबाल और निर्दलीय रामबीर शौकीन का भी साथ मिला। इसके बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और विपक्ष के नेता डॉ. हर्षवर्धन धीर को लेकर अध्यक्ष के आसन के पास आए।

कार्यवाहक अध्यक्ष ने आसन छोड़ा और स्थायी अध्यक्ष ने आसन ग्रहण कर लिया।  विधानसभा अध्यक्ष के पद पर धीर के निर्वाचन के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और विपक्ष के नेता नेता डॉ. हर्षवर्धन ने उन्हें बधाई दी। विपक्ष के नेता ने कहा कि मैं आपको तहेदिल से बधाई देता हूं और उम्मीद करता हूं कि आप विधानसभा की प्रतिष्ठा और परंपरा को अक्षुण्ण बनाए रखेंगे।

विपक्ष के नेता ने कहा कि मौजूदा विधानसभा बिल्डिंग से लम्बा इतिहास जुड़ा है। उन्होंने कहा कि 1925 में इस आसन को विट्ठलभाई पटेल जैसे लोगों ने सुशोभित किया था। उन्होंने कहा कि इस सदन को पंडित मदनमोहन मालवीय व गोपालकृष्ण गोखले जैसे प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी भी गरिमा प्रदान कर चुके हैं। वहीं, महात्मा गांधी भी विधानसभा भवन में दो बार पधार चुके हैं।

वरिष्ठ भाजपा विधायक साहिब सिंह चौहान ने कहा कि अगर सत्तापक्ष विपक्ष से विधानसभा अध्यक्ष को लेकर बातचीत कर लेता तो चुनाव की नौबत ही नहीं आती। इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा उपाध्यक्ष का पद विपक्ष को मिलना चाहिए।

 वहीं, जद (यू) विधायक शोएब इकबाल ने कहा कि अगर कांग्रेस अपने पत्ते पहले ही खोल देती तो विधानसभा अध्यक्ष के लिए चुनाव की नौबत नहीं आती। परम्परा के अनुसार सर्वसम्मति से विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव हो जाता। सत्तापक्ष और विपक्ष के कई सदस्यों ने धीर को अध्यक्ष बनने पर बधाई दी।


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