‘उत्तराखण्ड को है आतंकवादियों से सबसे ज्यादा खतरा’

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Saturday, January 04, 2014-1:03 PM

ऋषिकेश/देहरादून: भारत की विदेश व रक्षा नीति में खामियों के चलते भारत की आंतरिक सुरक्षा को चारों ओर से खतरा उत्पन्न हो गया है, जिससे ज्यादा प्रभावित झारखण्ड, छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त नवोदित राज्य उत्तराखण्ड भी अछुता नही है। यह विचार द्वारिका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी राज राजेश्वर आश्रम ने यहां शीशम झाड़ी स्थित रामानन्द आश्रम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान व्यक्त करते हुए कहा कि उक्त समस्या से जूझने के लिए हिन्दू समाज को राजनीतिक दृष्टि से जागरूक होने की आवश्यकता है जब तक हिन्दू समाज जागरूक नहीं होगा तो भारत इस्लामिक आतंकवादी गतिविधियों से जूझता रहेगा। उन्होने भारत पर चीन नेपाल पाकिस्तान पड़ोसी देशों से आतंकवाद के मंडरा रहे खतरों से निपटने के लिए विदेश नीति में मूल चूल परिवर्तन किये जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारत के उत्तराखण्ड राज्यों को सबसे अधिक खतरा इस समय माओवादी व इस्लामिक गतिविधियों से उत्पन्न हो रहा है।

 उन्होने कहा कि अभी हाल ही में नेपाल सीमा से उ.प्र.की सीमा में टूण्ड्रा जैसे आतंकवादी को पकड़े जाने की घटना ने हमारी खुफिया एजेन्सीयों की पेाल खोल कर रख दी है। उन्होने कहा कि उत्तराखण्ड को जहां देवभूमि के नाम से जाना जाता है वहीं यहां बढ़ती ईसाई मशीनरियों व इस्लामिक गतिविधियों से इसके अस्तित्व को खतरा भी बढ़ा है। क्योंकि उत्तराखण्ड को आतंकवादी आराम गृह के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। शंकराचार्य राजराजेश्वरानन्द का कहना था कि देश की स्वतंत्रता के बाद भारत की रक्षा व सुरक्षा नीति में ढीलापन होने के कारण पाकिस्तान, चीन व अन्य पड़ोसी देश भारत में अपनी गतिविधियां चलाकर इसे अस्थिर करने पर लगे है यहां तक की अमेरिका व चीन ने तो नेपाल को अपनी गतिविधि चलाने के लिए सेन्टर के रूप में स्थापित कर दिया है। जिसके लिए भारत को अपनी सुरक्षा के लिए स्पष्ट कठोर सुरक्षा नीति बनाने की आवश्यकता है।


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