नर्सरी दाखिले से सात अरब की आय

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Saturday, January 04, 2014-2:35 PM

नई दिल्ली (रोहित राय): दिल्ली के निजी स्कूल हर साल नर्सरी दाखिले से अरबों रुपए की कमाई करते हैं। नर्सरी दाखिले से जुड़े प्रॉसपेक्टस मनमाने दामों पर बेचकर स्कूल प्रबंधन करीब सात सौ करोड़ का कारोबार करते है। प्रत्येक स्कूल मनमाने दाम पर प्रॉसपेक्टस खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर करता है। अपने नौनिहालों के उज्जवल भविष्य की पहली सीढ़ी नर्सरी कक्षा में प्रवेश करने के लिए अभिभावक प्रॉसपेक्टस खरीदने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

शिक्षा निदेशालय द्वारा नर्सरी दाखिले के लिए तय किए गए दिशा-निर्देशों के मुताबिक कोई भी स्कूल प्रॉसपेक्टस अधिकतम दाम 25 रुपए से ज्यादा का नहीं बेच सकता। इसके अलावा स्कूल प्रबंधन किसी भी अभिभावक को प्रॉसपेक्टस खरीदने के लिए मजबूर भी नहीं कर सकता। मिली जानकारी के मुताबिक राजधानी के निजी स्कूलों में नर्सरी कक्षा की औसतन सीटें करीब दो लाख के करीब है। प्रत्येक स्कूल में लगभग सौ सीटें नर्सरी कक्षा की होती है। स्कूलों की नर्सरी दाखिले से कुल सालाना आय करीब 6,80,50,00000 है।

शिक्षा निदेशालय द्वारा नर्सरी दाखिले के लिए जारी किए जाने वाले दिशा-निर्देशों के मुताबिक सभी स्कूलों को नर्सरी कक्षा में दाखिले की पूरी जानकारी न सिर्फ निदेशालय को लिखित रूप से देनी होती है बल्कि निदेशालय की वेबसाइट पर भी डालती होती है। इसके अलावा स्कूलों को दाखिले से संबंधित तमाम तरह की छोटी-बड़ी जानकारियां अपने स्कूल के नोटिस बोर्ड पर भी लिखनी होती है।

दिशा-निर्देशों के अनुसार अगर स्कूल किसी अभिभावक का दाखिला किसी कारण से नकारता हैं तो इसकी भी पूरी जानकारी नोटिस बोर्ड पर दर्ज करनी होती हैलेकिन यह दिशा-निर्देश सिर्फ घोषणा बनकर ही रह जाते हैं। दाखिला प्रक्रिया के दौरान और प्रक्रिया के समाप्त होने के बाद गिने-चुने स्कूल ही इन दिशा-निर्देशों का पालन सही तरह से करते है। सीटें भी दी जाती है और अभिभावक स्कूलों के चक्कर लगाते रह जाते हैं।

दिल्ली में छोटे-बड़े करीब दो हजार निजी स्कूल हैं। इनमें से करीब 250 स्कूल ऐसे हैं जिनमें दाखिले के लिए अभिभावकों में होड़ सी मच जाती है। बच्चों के बेहतर और उज्जवल भविष्य व बेहतरीन सुविधाओं के लिए अभिभावक इन स्कूलों की मोटी फीस चुकाने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। स्कूलों को ऐसे अभिभावकों से सालाना प्रति बच्चा 80 हजार रुपए बचता है। एक बच्चे की साल भर की पढ़ाई पर तमाम तरह के खर्चों के साथ स्कूल की सालाना फीस लगभग एक से डेढ़ लाख रुपए तक बैठती है। इसमें से तमाम खर्चें निकालकर स्कूल प्रबंधन को करीब 80 से 90 हजार रुपए बचते है।

हर साल फीस बढ़ाई जाती है। दिल्ली के एक बड़े स्कूल में दसवीं और ग्यारहवीं कक्षा की एक महीने की फीस करीब 8 से दस हजार रुपए है। इसमें परिवहन की फीस अगल है। सुविधाओं, तमाम फंड और विकास के नाम पर बच्चों से अलग पैसे लिए जाते है। फीस बढ़ोतरी को लेकर भी हर साल खूब हो-हल्ला होता है लेकिन आखिर में होता वहीं है जो स्कूल प्रबंधन चाहते है। निजी जमीन पर चल रहे स्कूलों की वार्षिक आय 2 अरब रुपए के आस-पास है।

 


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